रुपये में पिछले कुछ दिनों से जारी गिरावट आज भी जारी रही। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज बुधवार को 95.80/$ का रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया।
मुंबई। भारतीय रुपये में पिछले कुछ दिनों से जारी गिरावट आज भी जारी रही। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज बुधवार को 95.80/$ का रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया। रुपये में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में कमजोरी दर्ज की गई। सोमवार को रुपया डालर के मुकाबले 95.31 पर बंद हुआ था। इससे पहले पिछले हफ्ते रुपए ने 95.43 का निचला स्तर छुआ था, जो अब टूट चुका है।
कच्चे तेल और वैश्विक तनाव से बढ़ा दबाव
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया संकट के बीच वैश्विक व्यापार में लंबे समय तक व्यवधान की आशंका के चलते बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 95.80 पर पहुंच गया। हालांकि बाद में थोड़ा सुधर कर रुपया आज 95.67 या 95.63 के आसपास बंद हुआ जो इसका अब तक का रिकॉर्ड निचला स्तर है। भारतीय रुपया साल 2026 की शुरुआत से ही दबाव में नजर आ रहा है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार पहुंचा था।
ट्रंप के बयान और तेल की कीमतों का असर
विदेशी मुद्रा विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर, सरकार द्वारा सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने का कदम सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर की समग्र मांग को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता है। माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान के बाद रुपया में यह गिरावट आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ संघर्ष विराम को लेकर अब बहुत आशान्वित नही हैं। ट्रम्प के द्वारा समझौता वार्ता को लेकर दिए बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।
ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर पार, RBI के दखल की बढ़ी उम्मीद
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंड क्रूड ऑयल के दाम बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इसका असर भारतीय रुपये पर भी देखने को मिला है। भारतीय रुपया 13 मई 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹95.80 के अब तक के सबसे निचले इंट्राडे स्तर पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए जल्द ही बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।
विदेशी निवेश में कमी और भू-राजनीतिक तनाव
विश्लेषकों के अनुसार, इस कमजोरी की मुख्य वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जिससे अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ी है। भारत अपनी अधिकांश कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल की कीमतें बढ़ने पर आयातकों को ज्यादा डॉलर की आवश्यकता होती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान-अमेरिका तनाव और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है।
यह भी पढ़ें: https://www.primenewsnetwork.in/india/gold-and-silver-prices-spike-as-india-hikes-import-duty-to-15/204413