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Janhvi Kapoor Kota Zari Saree Look: बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने आंध्र प्रदेश के तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर में दर्शन के दौरान कोटा की प्रसिद्ध हस्तकरघा कला से तैयार रियल गोल्ड और सिल्वर जरी की ‘सोनचिरैया’ साड़ी पहनी. बैंगनी रंग की इस रेशमी साड़ी में असली सोने-चांदी की महीन बुनाई की गई है. जाह्नवी का यह पारंपरिक लुक सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. इससे कोटा की सदियों पुरानी लुप्त होती कला और स्थानीय बुनकरों को राष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान मिली है, जिससे कला प्रेमियों में भारी उत्साह है.
Kota: हाड़ौती की सदियों पुरानी हस्तकरघा कला एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में है. बॉलीवुड अभिनेत्री Janhvi Kapoor ने अपनी फिल्म पेड्डी की रिलीज से पहले आंध्र प्रदेश स्थित पवित्र Tirumala Venkateswara Temple में दर्शन किए. इस दौरान उन्होंने कोटा की प्रसिद्ध रियल गोल्ड और सिल्वर जरी से बुनी ‘सोनचिरैया’ कोटा साड़ी धारण कर हाड़ौती की विरासत को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई.
बैंगनी रंग की इस विशेष रेशमी साड़ी में असली सोने-चांदी की जरी की महीन बुनाई और पारंपरिक फूलदार डिजाइन थे. जाह्नवी का यह पारंपरिक लुक सोशल मीडिया से लेकर फैशन जगत तक चर्चा का विषय बन गया. खास बात यह रही कि यह साड़ी कोटा के बुनकरों की उस कला का प्रतीक है, जो पीढ़ियों से हस्तकरघों पर जीवित है.
राजघरानों से बॉलीवुड तक पहुंची कोटा जरी
रियल जरी कोटा साड़ी लंबे समय तक केवल राजघरानों और विशेष अवसरों तक सीमित रही. अब यह विरासत देश की प्रतिष्ठित हस्तियों की पसंद बनती जा रही है. Radhikaraje Gaekwad, Ambika Raje, Rashmi Raje, Tina Ambani और Priya Gupta जैसी हस्तियां भी इस विरासती परिधान को अपना चुकी हैं. जाह्नवी कपूर के इस लेटेस्ट लुक ने युवाओं के बीच भी इस पारंपरिक पहनावे के प्रति नया क्रेज पैदा कर दिया है.
लुप्त होती कला को मिला नया जीवन
‘सोनचिरैया’ की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक के अनुसार रियल जरी कोटा साड़ी कोई सामान्य वस्त्र नहीं, बल्कि हाड़ौती की सांस्कृतिक पहचान है. इसमें शुद्ध रेशम और सूती धागों को असली सोने-चांदी की जरी के साथ जोड़कर पारंपरिक पिटलूम पर हाथ से बुना जाता है. बीते वर्षों में इस लुप्तप्राय कला को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं, जिससे कोटा की यह विरासत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच सके.
हाड़ौती के लिए बड़ी उपलब्धि
जाह्नवी कपूर द्वारा तिरुमला मंदिर जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल पर कोटा की रियल जरी साड़ी पहनना केवल फैशन नहीं, बल्कि हाड़ौती की कला, संस्कृति और बुनकरों के हुनर का सम्मान है. इससे न केवल कोटा डोरिया और जरी बुनाई को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय बुनकरों के लिए रोजगार और बाजार के नए अवसर भी खुलेंगे. हाड़ौती की धरती पर बुना गया यह सोने-चांदी का ताना-बाना अब देशभर में अपनी चमक बिखेर रहा है और कोटा की विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की राह पर आगे बढ़ रहा है.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें