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साउथ सिनेमा के सुपरस्टार ने अपने अतीत को लेकर एक हैरान करने वाला खुलासा किया है. एक हालिया पॉडकास्ट में उन्होंने बताया कि 17 साल की उम्र में दुनिया के हालातों को देखकर उनके भीतर इस कदर गुस्सा भरा था कि वह नक्सलवाद की राह पर चलने का मन बना लिया था. उनका मन बंदूक उठाने का हो गया था, लेकिन ऐन वक्त पर बड़े भाई ने परिवार की जिम्मेदारियों का अहसास कराया. भाई के इस जरूरी दखल की वजह से ही वह उस खतरनाक रास्ते पर जाने से रुक गए थे.
नई दिल्ली. सुपरस्टार पवन कल्याण आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचने से पहले उनकी जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया था जब वह बिल्कुल अलग रास्ते पर निकल पड़े थे. पवन कल्याण इन दिनों आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री की कुर्सी भी संभाल रहे हैं. हाल ही में उन्होंने खुलासा किया कि कभी वह नक्सली बनना चाहते थे और उन्हें लगता था कि न्याय के लिए बंदूक उठाना ही एकमात्र जरिया बचा है.
एएनआई के पॉडकास्ट में स्मिता प्रकाश के साथ बातचीत के दौरान पवन कल्याण ने कुबूल किया कि एक वक्त वह नक्सलवाद की तरफ काफी आकर्षित हो गए थे और उन्होंने कुछ जनसभाओं में हिस्सा भी लिया था, लेकिन उनके बड़े भाई (चिरंजीवी) ने उन्हें इस दलदल में जाने से रोक लिया.
पवन कल्याण ने बताया कि उस दौर में दुनिया के जो हालात थे, उन्हें देखकर उनके भीतर बहुत गुस्सा भरा हुआ था. 80 के दशक में वह एक टीनेजर थे, और उस समय की बड़ी वैश्विक घटनाओं का उन पर गहरा असर पड़ रहा था. दक्षिण अफ्रीका में जारी रंगभेद, श्रीलंका का लिट्टे आंदोलन जिसका असर चेन्नई तक दिख रहा था, कोल्ड वॉर, जर्मनी का आंतरिक संकट और भारत में खालिस्तानी उग्रवाद जैसी तमाम घटनाओं ने उनके युवा दिमाग को अंदर तक झकझोर कर रख दिया था.
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पवन कल्याण ने उस दौर के अपने मानसिक हालातों को बयां करते हुए कहा, ‘एक वक्त ऐसा था जब मैं वाकई नक्सली बनने के बारे में सोच रहा था. हां, जब मैं अपने टीनेज के आखिरी दिनों में था, तब मेरे मन में बंदूक उठाने का ख्याल आया था. तभी मेरे भाई ने मुझे संभाला और मेरा ध्यान किसी सकारात्मक काम की ओर मोड़ा.’
सुपरस्टार ने बताया, ‘उन्होंने (चिरंजीवी) मुझसे पूछा था कि तुम्हारे भीतर यह पागलपन भरा गुस्सा कहां से आ रहा है? मैंने उनसे कहा कि मैं समाज में फैले अन्याय की बात कर रहा हूं, हमें इसके खिलाफ कुछ करना चाहिए. वह मेरी इस सोच से बेहद चिंतित हो गए थे. मेरे भीतर का यह गुस्सा 17 से 21 साल की उम्र तक रहा, क्योंकि यही वह उम्र होती है जब आप बिना सोचे-समझे किसी भी चीज में कूद जाते हैं.’
उन्होंने आगे बताया कि उन्हें लगता था कि बंदूक उठाना ही हर समस्या का इकलौता समाधान है. उस वक्त वह छात्रों के साथ चुपचाप ऐसी जनसभाओं में चले जाते थे जहां उन्हें कोई नहीं पहचानता था. इतना ही नहीं, वह शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल्स का हिस्सा बनने और डॉक्यूमेंट्रीज बनाने के लिए मुंबई भी गए. एक्टर से नेता बने पवन कल्याण ने माना कि वह जिंदगी में अलग-अलग चीजें एक्सपेरिमेंट कर रहे थे, लेकिन वह अंदर से बिल्कुल खुश नहीं थे. वह खुद को एक जगह फंसा हुआ और गुस्से से भरा हुआ महसूस करते थे.
पवन कल्याण ने बताया कि उनकी जिंदगी के उसी मोड़ पर उनके बड़े भाई की एंट्री हुई. उन्होंने कहा, ‘भाई ने मुझसे सिर्फ एक बात पूछी कि अगर तुम्हारा भाई चिरंजीवी न होता, अगर तुम्हारे ऊपर अपने परिवार की जिम्मेदारियां होतीं और अगर कोई तुम्हारी नौकरी या मेहनत की कमाई पर निर्भर होता, तब भी क्या तुम यही सब करते? इस सवाल का मेरे पास कोई जवाब नहीं था. मैं बिल्कुल खामोश हो गया.’ पवन ने बताया कि इसके बाद उन्होंने अध्यात्म का रास्ता चुना और फिर एक्टिंग क्लासेस ज्वाइन कीं.
करियर की बात करें तो पवन कल्याण ने साल 1996 में फिल्म ‘अक्कदा अम्मयी इक्कदा अब्बायी’ से अपना डेब्यू किया था. हालांकि, उन्हें पहली बड़ी कामयाबी 1998 में आई फिल्म ‘थोली प्रेमा’ से मिली. पिछले साल यानी 2025 में वह ‘हरि हर वीरा मल्लु’ और ‘दे कॉल हिम ओजी’ जैसी फिल्मों में नजर आए थे, जबकि इस साल उनकी फिल्म ‘उस्ताद भगत सिंह’ रिलीज हुई. खबर है कि पवन कल्याण ने डायरेक्टर सुरेंद्र रेड्डी के साथ एक अनटाइटल्ड फिल्म के लिए हाथ मिलाया है.