पश्चिम एशिया अमेरिका – 2023 ईरान युद्ध तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ महीनों से गिरावट का सिलसिला जारी है।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया अमेरिका – 2023 ईरान युद्ध तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ महीनों से गिरावट का सिलसिला जारी है। घरेलू शेयर मार्केट से विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण स्टॉक मार्केट के दोनों इंडेक्स रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। बोफा ग्लोबल रिसर्च (BofA Global Research) ने एक रिपोर्ट मे कहा है कि ऐसे माहौल में विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी 2027 से पहले मुश्किल हो सकती है।
विदेशी निवेशकों ने निकाले $23 अरब
बोफा ग्लोबल रिसर्च (BofA Global Research) बैंक ऑफ अमेरिका (Bank of America) की प्रमुख रिसर्च और विश्लेषण शाखा है। यह दुनिया भर के आर्थिक रुझानों, वित्तीय बाजारों, और विभिन्न कंपनियों पर डेटा-आधारित गहन रिपोर्ट जारी करती है। एक आकलन के अनुसार भारतीय शेयर बाजार में घरेलू निवेशक जितना पैसा लगा रहे हैं, विदेशी निवेशक उतनी ही तेजी से निकल रहे हैं। 2026 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय इक्विटी से करीब 23 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। निफ्टी इस साल करीब 9 फीसदी टूट चुका है। इसके बावजूद भारत का मूल्यांकन एशिया के कई बाजारों से महंगा बना हुआ है।
2027 तक विदेशी निवेशकों की वापसी मुश्किल
बोफा ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि विदेशी निवेशकों की बड़ी वापसी 2027 से पहले मुश्किल हो सकती है। BofA ग्लोबल रिसर्च के अनुसार, विदेशी निवेशक 2027 या 2028 तक भारतीय शेयरों से दूरी बनाए रख सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत के लिए कमाई के अनुमानों (earnings forecasts) में कटौती की जा रही है, जबकि दक्षिण कोरिया और ताइवान AI निवेश के कारण अपग्रेड देख रहे हैं।
कमजोर रुपया और धीमी कमाई बनी बड़ी चिंता
भारत में विदेशी निवेशक इस समय दोहरी चिंता से ग्रस्त हैं। कंपनियों की कमाई तेज नहीं बढ़ रही और रुपया कमजोर है। विदेशी निवेशकों के लिए नुकसान शेयरों की गिरावट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रुपये की कमजोरी उसके डॉलर रिटर्न को घटा देती है। ऐसे में भारत जैसे महंगे बाजार में टिकने के लिए उन्हें मजबूत कमाई चाहिए, जो अभी नहीं दिख रही।
महंगे वैल्यूएशन से विदेशी निवेशक बना रहे दूरी
बोफा ने चालू वित्त वर्ष में निफ्टी 50 कंपनियों की कमाई वृद्धि 7% और मार्च, 2027 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए 8.5% रहने का अनुमान लगाया है। यानी कमाई की रफ्तार साधारण है, जबकि बाजार महंगा है। निफ्टी करीब 18 गुना एक साल आगे की कमाई पर ट्रेड कर रहा है। इसके मुकाबले दक्षिण कोरिया का बाजार लगभग 7.5 गुना पर है। यही अंतर विदेशी पूंजी को भारत से बाहर खींच रहा है।
AI बाजारों की ओर बढ़ रहा वैश्विक निवेश
अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने रिपोर्ट में कहा है कि विदेशी पैसा भारत छोड़कर एशिया के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की प्रमुखता वाले बाजारों की ओर जा रहा है। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजार सेमीकंडक्टर, चिप सप्लाई चेन और एआई पूंजीगत खर्च से सीधे जुड़े हैं। वहां कमाई के अनुमान सुधर रहे हैं और मूल्यांकन भारत से कम है। इसलिए, वैश्विक निवेशक फिलहाल भारत की खपत की कहानी से ज्यादा एआई को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारत के लिए राहत घरेलू पैसा है। म्यूचुअल फंड और खुदरा निवेशक बाजार को संभाले हुए हैं।
AI की उम्मीदों के बीच लगातार बिकवाली
इस साल भारतीय शेयर वैश्विक बाजारों की तुलना में खराब प्रदर्शन कर रहे हैं। $23 बिलियन की रिकॉर्ड विदेशी बिकवाली से स्थिति और खराब हो गई है, खासकर कमजोर होते रुपये के कारण, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय पैसा अन्य एशियाई देशों में AI अवसरों की ओर बढ़ रहा है। BofA ग्लोबल रिसर्च ने मार्च 2027 में समाप्त होने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए NSE Nifty 50 Index की कंपनियों के लिए लगभग 8.5% की कमाई वृद्धि का अनुमान लगाया है। यह चालू फाइनेंशियल ईयर के अनुमानित 7% से मामूली वृद्धि है। BofA में भारत अनुसंधान प्रमुख, अमीश शाह ने इसे ‘भारत के लिए कम बेस पर कम वृद्धि’ बताया, जो दक्षिण कोरिया और ताइवान में देखी गई मजबूत कमाई वृद्धि के बिल्कुल विपरीत है।
उच्च मूल्यांकन और आर्थिक चुनौतियाँ
हाल की 9% गिरावट के बाद भी, Nifty 50 इंडेक्स अभी भी प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है, जो कि उसके एक साल के फॉरवर्ड आय का लगभग 18 गुना है। यह मूल्यांकन दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में काफी अधिक है, जो 7.5 गुना आय पर कारोबार करता है और इस साल दुनिया का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शेयर बाजार बन गया है। BofA ने पहले भारत में स्टैगफ्लेशन (stagflation) के बढ़ते जोखिमों के बारे में चेतावनी दी थी, जिसका आंशिक कारण आयातित ऊर्जा पर निर्भरता और पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष है। रुपये का अवमूल्यन भी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थायी संरचनात्मक समस्या के रूप में देखा जा रहा है।
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