पूर्णिमा को चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
नई दिल्ली : पूर्णिमा तिथि हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, और जब बात अधिकमास की आती है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस बार ज्येष्ठ का महीना अधिकमास है। हम सभी 30 मई 2026 को इस खास दिन का स्वागत करेंगे। 30 मई को शिव योग का शुभ संयोग बन रहा है, जिससे लक्ष्मी-नारायण की पूजा से सुख और समृद्धि मिलेगी। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। खास बात ये है कि इस दिन दान और स्नान का फल सामान्य पूर्णिमा से कई गुना ज्यादा मिलता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति
पूर्णिमा तिथि 30 मई की सुबह 11:57 बजे शुरू होगी और 31 मई को दोपहर 2:14 बजे समाप्त होगी। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मालपुए का दान करना शुभ माना जाता है। जल, अन्न, वस्त्र और गायों के लिए चारा भी दान करना चाहिए। इस मौके पर दीपदान का भी खास महत्व है, क्योंकि इससे पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
31 मई को बन रहा सिद्धि योग
इसके अलावा, 31 मई को सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो दान-पुण्य और पूजा-पाठ के लिए बेहद फलदायी है। इस दिन स्नान-दान करने से शारीरिक और मानसिक तनाव कम होने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस बार अधिक मास की पूर्णिमा को अपने घर में पूजा-पाठ और दान का खास ध्यान रखें, ताकि आप भी इस शुभ अवसर का लाभ उठा सकें!