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भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी का तमिलनाडु से रिश्ता किसी परिचय का मोहताज नहीं है. चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान के रूप में वर्षों तक टीम का नेतृत्व करने वाले धोनी को वहां के फैंस सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं.
नई दिल्ली. चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी को तमिलनाडु में ‘थाला’ कहा जाता है. धोनी को मिलने वाला सम्मान उनके परिवार तक भी पहुंचता है और उनकी पत्नी साक्षी धोनी भी साउथ भारत के लोगों के बीच खास पहचान रखती हैं.
हाल ही में मलयालम और तमिल सिनेमा के जाने-माने अभिनेता जयराम ने साक्षी धोनी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया. अभिनेता के अनुसार, यह घटना आईपीएल के दौरान चेन्नई के प्रतिष्ठित चेपॉक स्टेडियम में हुई थी.
जयराम ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ चेन्नई सुपर किंग्स का मैच देखने पहुंचे थे. उसी दौरान साक्षी धोनी भी स्टेडियम में मौजूद थीं. मैच का माहौल बेहद एक्साइटमेंट भरा था और जयराम अपने परिवार के साथ खेल का आनंद ले रहे थे. उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में एक ऐसा पल आने वाला है, जिसे वह लंबे समय तक याद रखेंगे.
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अभिनेता के मुताबिक, उन्होंने साक्षी को देखा जरूर, लेकिन उन्हें लगा कि शायद वह उन्हें पहचानती नहीं होंगी. इसलिए उन्होंने उनसे बातचीत करने की कोशिश नहीं की. लेकिन कुछ देर बाद अचानक साक्षी उनकी ओर बढ़ीं. जयराम के अनुसार, वह सीधे उनके पास आईं, उनके पैर छुए और आशीर्वाद लिया. यह देखकर अभिनेता हैरान रह गए.
साक्षी को अपने पैरों में गिरता देख जयराम खुशी से पूछ उठे कि ‘क्या आप जानते हैं?’. इस पर साक्षी ने तुरंत जवाब दिया, ‘बिल्कुल सर, मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूं’. यह सुनकर जयराम को काफी खुशी हुई. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि क्रिकेट जगत के सबसे चर्चित परिवार से जुड़ी शख्सियत उनकी फिल्मों की इतनी बड़ी प्रशंसक होंगी.
बातचीत के दौरान साक्षी ने उन्हें बताया कि उनके जयराम का फैन बनने की कहानी भी काफी दिलचस्प है. उन्होंने कहा कि उनके घर में काम करने वाली एक महिला मलयाली थीं. वह अक्सर अपनी बच्ची को सुलाने के लिए जयराम की फिल्म ‘अद्वैतम’ का पॉपुलर गीत ‘अंबलाप्पुला उन्निक्कण्णन’ सुनाया करती थीं. यह गीत साक्षी ने भी कई बार सुना और धीरे-धीरे उन्हें यह इतना पसंद आने लगा कि उन्होंने जयराम की फिल्मों में रुचि लेनी शुरू कर दी. समय के साथ वह अभिनेता की बड़ी प्रशंसक बन गईं.
जयराम ने कहा कि एक कलाकार के लिए इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है कि उसकी कला भाषा और क्षेत्र की सीमाओं को पार कर लोगों के दिलों तक पहुंचे. उन्होंने इस मुलाकात को अपने जीवन की सबसे खास और भावुक यादों में से एक बताया.