Suman kalyanpur death reason: 1960 और 70 दशक की मशहूर बॉलीवुड पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन हो गया है. उन्होंने 89 साल की उम्र में अपने मुंबई आवास में आखिरी सांस ली. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (31 मई) को सुमन कल्याणपुर का निधन एज रिलेटेड प्रॉब्लम्स के कारण हुआ है. उनकी आवाज काफी सुरीली थी और उनके लाखों फैंस थे. ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे, तुमने पुकारा और हम चले आए, जिंदगी इम्तिहान लेती है, आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर जबान पर, ये समा जैसे सुपरहिट गानों को अपनी आवाज से सजाया था. कई एक्टर-एक्ट्रेस या फिर आम इंसान अक्सर बढ़ती उम्र में होने वाली समस्याओं से अपनी जिंदगी गंवा बैठते हैं. ऐसा ही हुआ सुमन कल्याणपुर के साथ. काफी दिनों से वे बढ़ती उम्र से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं.
बढ़ती उम्र की दिक्कतें क्या होती हैं?
उम्र बढ़ने से जुड़ी मृत्यु (Age-related death) किसी एक कारण से नहीं होती है, बल्कि इसमें बढ़ती उम्र के साथ शरीर के अंगों और सिस्टम का सही से काम ना करना, कमजोर हो जाने से भी गंभीर हेल्थ से संबंधित समस्याओं के होने का रिस्क बढ़ जाता है. आमतौर पर बढ़ती उम्र में मौत होने की वजह इनमें से एक या एक से अधिक बीमारियां बनती हैं.
उम्र बढ़ने के साथ मौत का जोखिम बढ़ाने वाली प्रमुख समस्याएं
हृदय रोग (Heart Disease)- इसमें अनियमित दिल की धड़कन (Arrhythmia), हार्ट संबंधित समस्याएं जैसे हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज मौत का कारण बन सकती हैं. दुनियाभर में बुजुर्गों की मृत्यु के सबसे बड़े कारणों में हृदय रोग शामिल है.
स्ट्रोक (Stroke)- स्ट्रोक के कारण भी बुजुर्गों में अचानक मौत हो सकती है. इसमें ब्रेन में रक्त प्रवाह रुक जाता है, बाधित होने लगता है, जिससे लकवा मार सकता है, बेहोशी या मौत का कारण बन सकता है.
कैंसर (Cancer)- कई बार बढ़ती उम्र में अंग कमजोर हो जाते हैं. सही तरीके से काम नहीं करते हैं. खासकर, बुजुर्गों में फेफेड़ों का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर होने का जोखिम बढ़ती उम्र के साथ बढ़ जाता है.
डिमेंशिया और अल्जाइमर- बुजुर्गों में अल्जाइमर्स रोग जिसमें भूलने की समस्या, याद्दाश्त और ब्रेन की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है. गंभीर स्थिति में मरीज संक्रमण, कुपोषण या अन्य जटिलताओं के कारण अपनी जान गंवा सकता है.
श्वसन रोग (Respiratory Diseases)- बढ़ती उम्र में सांस संबंधित समस्याओं के होने का भी रिस्क काफी बढ़ जाता है. इसमें निमोनिया, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), निमोनिया, फेफड़ों में इंफेक्शन होने से लंग्स की कार्य करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है, जिससे मौत का रिस्क बढ़ जाता है.
संक्रमण (Infections)- उम्र बढ़ने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे इंफेक्शन बहुत जल्दी हो सकता है. निमोनिया, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, सेप्सिस जैसी स्थितियां जानलेवा हो सकती हैं.
किडनी फेल्योर- किडनी भी बढ़ती उम्र में सही से काम नहीं करती है. इसकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है. इससे शरीर से टॉक्सिन पदार्थ एकत्रित होने लगते हैं और बाहर नहीं निकल पाते हैं. यह काफी खतरनाक होता है, इसमें व्यक्ति की मौत हो सकती है.
डायबिटीज की जटिलताएं- यदि डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में ना रहे, खासकर टाइप 2 डायबिटीज लंबे समय तक कंट्रोल में ना रहे तो हार्ट डिजीज, किडनी फेल्योर, स्ट्रोक आदि होने का खतरा बढ़ जाता है.
गिरना और फ्रैक्चर होना- बुजुर्गों की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, बैलेंस भी कम हो जाता है, जिससे गिरने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है. ऐसे में कूल्हे (Hip) की हड्डी टूटना गंभीर जटिलताओं और मृत्यु का कारण बन सकती है.
शारीरिक कमजोरी- बढ़ती उम्र में शरीर कमजोर होने लगता है. चलने-फिरने में समस्या आती है. मसल्स कमजोर हो जाती हैं. वजन घटने लगता है. इस कंडीशन को Frailty यानी भंगुरता, अस्थिरता कहा जाता है, जो इंफेक्शन, अन्य बीमारियों के होने का खतरा भी बढ़ा देती है.
उम्र बढ़ने पर स्वस्थ रहने के उपाय
नियमित सेहत की जांच कराते रहें.
संतुलित और हेल्दी डाइट लें.
हर दिन फिजिकल एक्टिविटी, एक्सरसाइज करें.
पर्याप्त नींद लेना भी हेल्दी रहने के लिए जरूरी है.
धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचाव.
ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल चेक करते रहना.