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छूते ही अपनी पत्तियां समेट लेने वाला छुईमुई (लाजवंती) का पौधा सिर्फ अपनी अनोखी विशेषता के लिए ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद में बताए गए औषधीय गुणों के कारण भी खास माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार इसकी पत्तियों, जड़ और तने का उपयोग कई पारंपरिक उपचारों में किया जाता है, हालांकि इसके इस्तेमाल से पहले उचित सलाह लेना जरूरी है.
गोंडा: प्रकृति में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं जो अपने अनोखे गुणों के कारण लोगों को हैरान कर देते हैं. ऐसा ही एक पौधा है छुईमुई, जिसे छुईमुई या लाजवंती के नाम से भी जाना जाता है. इस पौधे की सबसे खास बात यह है कि जैसे ही कोई इसकी पत्तियों को छूता है, वे तुरंत सिकुड़कर बंद हो जाती हैं. कुछ समय बाद पत्तियां फिर से सामान्य अवस्था में आ जाती हैं. यही अनोखी विशेषता इसे दूसरे पौधों से अलग बनाती है.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि छुईमुई सिर्फ अपनी अनोखी हरकत के लिए ही नहीं, बल्कि अपने औषधीय गुणों के लिए भी प्रसिद्ध है. आयुर्वेद में इस पौधे का उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. इसकी पत्तियां, जड़ और तना कई पारंपरिक उपचारों में काम आते हैं.
वैद्य के अनुसार छुईमुई में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो शरीर को कई तरह की समस्याओं से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसका उपयोग छोटे घाव, सूजन और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए करते हैं. माना जाता है कि इसकी पत्तियों का लेप लगाने से घाव जल्दी भरने में मदद मिल सकती है.
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छुईमुई का उपयोग पाचन संबंधी समस्याओं में भी किया जाता है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञ जमुना प्रसाद यादव का मानना है कि इसका सेवन सीमित मात्रा में करने से पेट की कुछ परेशानियों में लाभ मिल सकता है. कुछ लोग इसे मूत्र संबंधी समस्याओं और शरीर की कमजोरी दूर करने के लिए भी उपयोग करते हैं.
छुईमुई में एंटीऑक्सीडेंट और कई अन्य प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं. हालांकि इसके फायदों को लेकर कई पारंपरिक मान्यताएं हैं, लेकिन किसी भी बीमारी के इलाज के लिए इसे सीधे इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए.
छुईमुई का पौधा आमतौर पर खेतों के किनारे, खाली जमीन और बगीचों में आसानी से उग जाता है. बरसात के मौसम में इसकी बढ़वार तेजी से होती है. इसके छोटे-छोटे गुलाबी रंग के फूल भी काफी आकर्षक दिखाई देते हैं.
विशेषज्ञ जमुना प्रसाद यादव का कहना है कि प्राकृतिक औषधीय पौधों का उपयोग हमेशा सावधानी के साथ करना चाहिए. छुईमुई के कई फायदे बताए जाते हैं, लेकिन बिना सही जानकारी और सलाह के इसका सेवन करना नुकसानदायक भी हो सकता है. इसलिए किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है.
छुईमुई अपनी अनोखी विशेषता और औषधीय महत्व के कारण लोगों के बीच आज भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. छूते ही सिकुड़ जाने वाला यह पौधा प्रकृति का एक अद्भुत उपहार माना जाता है, जो अपने गुणों के कारण वर्षों से लोगों के काम आ रहा है.