उम्र बढ़ने के साथ शरीर का संतुलन और मांसपेशियों की ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे गिरने का जोखिम बढ़ जाता है. कई बार मामूली फिसलन या संतुलन बिगड़ने से भी बुजुर्गों को गंभीर चोट लग सकती है. ऐसे में नियमित योगाभ्यास शरीर को मजबूत बनाने और गिरने की संभावना कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
क्यों बढ़ जाता है गिरने का जोखिम?
60 वर्ष या उससे अधिक उम्र में मांसपेशियों की कमजोरी, जोड़ों में अकड़न और संतुलन बनाए रखने की क्षमता में कमी आम बात है. इन कारणों से रोजमर्रा के काम करते समय भी गिरने की आशंका बढ़ जाती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बुजुर्गों में गिरना चोट और विकलांगता के प्रमुख कारणों में शामिल है.
योग कैसे करता है मदद?
आयुष मंत्रालय के मुताबिक, नियमित योगाभ्यास शरीर के संतुलन, लचीलापन और समन्वय (कोऑर्डिनेशन) को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है. विभिन्न अध्ययनों में भी पाया गया है कि योग करने वाले वरिष्ठ नागरिकों में बैलेंस और मोबिलिटी में सुधार देखा गया, जिससे गिरने का खतरा कम हो सकता है.
कौन-से योगासन हैं फायदेमंद?
कुछ सरल योगासन बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं, जैसे:
वृक्षासन – शरीर का संतुलन बेहतर बनाने में मदद करता है.
ताड़ासन – मुद्रा सुधारने और स्थिरता बढ़ाने में सहायक है.
भुजंगासन – पीठ और रीढ़ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है.
सेतु बंधासन – कमर, कूल्हों और पैरों की ताकत बढ़ाने में उपयोगी है.
इन आसनों का नियमित अभ्यास शरीर को अधिक स्थिर और सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकता है.
मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है सकारात्मक असर
योग केवल शारीरिक मजबूती तक सीमित नहीं है. यह तनाव, डर और घबराहट को कम करने में भी मदद करता है. नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति अपने दैनिक कार्य अधिक सहजता से कर पाता है.
कितनी देर करें योग?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि रोजाना 20 से 30 मिनट योग करना भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है. हालांकि, यदि किसी को पहले से कोई बीमारी, जोड़ों की समस्या या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है, तो योग की शुरुआत प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में करना अधिक सुरक्षित रहता है.