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छतरपुर जिले में दो ऐसी घास भी पाई जाती हैं जिन्हें अक्सर लोग एक जैसा ही समझ बैठते हैं. दरअसल, जिले में जंगल या सड़क किनारे सत्यानाशी या भटकटैया घास देखने को मिल जाती है. जिसे लोग एक समान ही समझ लेते हैं लेकिन ये दोनों ही अलग होते हैं. इन दोनों की पहचान अलग होती है.
Health Tips. मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में खेत या सड़क किनारे दो ऐसी औषधीय घास पाई जाती है जिसे ज्यादातर लोग बेकार समझते हैं लेकिन जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इस घास का औषधीय उपयोग करते हैं. छतरपुर के वैद्य ईश्वरदीन बताते हैं कि जिले में कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. इन्हीं में से एक है भटकटैया,तो दूसरी सत्यानाशी है. ये दोनों पथरीली और बंजर जमीन पर आसानी से उग जाती हैं.
छतरपुर जिले में जंगल-खेत या सड़क किनारे ये औषधीय पौधा 12 महीने देखने को मिल जाता है. इसे सत्यानाशी या केसरा के नाम से भी जाना जाता है. इसकी पहचान इसके पत्ते होते हैं. जिनमें कांटे होते हैं. साथ ही इसमें पीला फूल भी निकलता है. फूल के साथ बीज भी पाए जाते हैं.
ये है भटकटैया की पहचान
वहीं भटकटैया या कंटकारी की पहचान भी इसके पत्ते होते हैं. चारों ओर कांटों से घिरा यह पौधा वर्षों से आयुर्वेदिक उपचार में उपयोग होता आ रहा है और कई बीमारियों के उपचार में बेहद उपयोगी माना जाता है. इसमें बैंगनी रंग के फूल खिलते हैं. साथ ही इसमें बैंगन के साईज के छोटे-छोटे फल भी आते हैं जिसका औषधीय उपयोग भी होता है.
भटकटैया के औषधीय गुण
डॉ आरसी द्विवेदी बताते हैं कि यह पौधा पेट दर्द, गैस और अपच जैसी समस्याओं में भी राहत देता है. जोड़ों के दर्द में भी राहत देता है. दांत दर्द होने पर इसके बीजों का धुआं या काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से तुरंत आराम मिलता है. मुंह के छाले भी इसके सेवन से ठीक हो जाते हैं. इसके अलावा मूत्राशय की पथरी के दर्द में भी यह काफी उपयोगी माना जाता है.
खून साफ करता है भटकटैया पौधा
उन्होंने आगे बताया कि भटकटैया के उपयोग से रक्त शुद्ध होता है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याओं में सुधार आता है. मुंहासे और एक्जिमा जैसी परेशानियों में इसके फायदे देखे गए हैं. पौधे की जड़ भूख बढ़ाने में भी सहायक होती है, जिससे कमजोर और दुबले पतले लोगों को फायदा मिलता है. परंपरागत इलाज में इस पौधे को वर्षों से महत्वपूर्ण औषधि के रूप में उपयोग किया जाता रहा है.
सत्यानाशी के औषधीय गुण
छतरपुर के आयुर्वेदिक डॉ. आरसी द्विवेदी लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि आयुर्वेद में केसरा या सत्यानाशी के पत्ते का रस, बीज का तेल, पत्तियों का लेप और फूलों से निकलने वाले दूध का इस्तेमाल कई तरीकों से किया जाता है. वैसे तो इस पौधे का इस्तेमाल मुख्य रूप से शारीरिक कमजोरी को दूर करने के लिए किया जाता है, लेकिन इसके विभिन्न औषधीय गुण मधुमेह, पीलिया, पेट दर्द, खांसी और यूरिन की समस्या में भी राहत प्रदान करते हैं. दरअसल, इस पौधे में पीले रंग का द्रव्य निकलता है, जिसमें एंटी माइक्रोबियल, एंटी-डायबिटिक, एनाल्जेसिक, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटीस्पास्मोडिक और एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई गुणकारी तत्व पाए जाते हैं.
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