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छतरपुर जिले में में कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. इन्हीं में से एक है भटकटैया, जो आयुर्वेद में कंटकारी नाम से प्रसिद्ध है. क्षेत्रीय भाषा में भटकटैया के नाम से जानते हैं. यह पौधा पथरीली और बंजर जमीन पर आसानी से उग जाता है. चारों ओर कांटों से घिर पौधा वर्षों से आयुर्वेदिक उपचार में उपयोग होता आ रहा है.
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में में कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. इन्हीं में से एक है भटकटैया, जो आयुर्वेद में कंटकारी नाम से प्रसिद्ध है. क्षेत्रीय भाषा में भटकटैया के नाम से जानते हैं. यह पौधा पथरीली और बंजर जमीन पर आसानी से उग जाता है. चारों ओर कांटों से घिर पौधा वर्षों से आयुर्वेदिक उपचार में उपयोग होता आ रहा है.कई बीमारियों के उपचार में बेहद उपयोगी माना जाता है.
स्थानीय निवासी देवीदीन प्रजापति लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि भटकटैया शुष्क और गर्म जलवायु में खूब पनपता है. बुंदेलखंड क्षेत्र का मौसम इसके लिए बेहद अनुकूल है. इसका उपयोग हम तो सालों से करते आ रहे हैं. हमारे वैद्य बताया करते हैं कि इसके फलों के उपयोग से जोड़ों का दर्द भी ठीक हो जाता है. इसके साथ ही हमारे बुजुर्ग भी बताया करते हैं कि उनके बाबा भी इस औषधीय घास के फलों का उपयोग पैरों के दर्द में ठीक करते थे.
इसके लेप से पैर घुटनों के दर्द होते कम
देवीदीन बताते हैं कि हमारे गांव में सभी इस घास के औषधीय गुणों के बारे में जानते हैं. मैं खुद इस घास के फलों का उपयोग सालों से कर रहा हूं. इसके फल बैंगन यानि भटा जैसे होते हैं. इसलिए इसे भटकटैया कहते हैं. इसमें भटा जैसे ही कांटे होते हैं. इसे सावधानी से तोड़ना होता है. इसे तोड़कर घर ले जाते हैं. सबसे पहले इस फल को फोड़ते-कुचरते हैं. फिर इसके लेप को पैर घुटनों के दर्द में लगाते हैं. घुटनों-जोड़ों के दर्द में भटकटैया का फल रामबाण साबित होता है.वहीं डॉ आरसी द्विवेदी बताते हैं कि यह पौधा पेट दर्द, गैस और अपच जैसी समस्याओं में भी राहत देता है. दांत दर्द होने पर इसके बीजों का धुआं या काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से तुरंत आराम मिलता है. मुंह के छाले भी इसके सेवन से ठीक हो जाते हैं. इसके अलावा मूत्राशय की पथरी के दर्द में भी काफी उपयोगी माना जाता है.
खून साफ करता है भटकटैया पौधा
उन्होंने आगे बताया कि भटकटैया के उपयोग से रक्त शुद्ध होता है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याओं में सुधार आता है. मुंहासे और एक्जिमा जैसी परेशानियों में इसके फायदे देखे गए हैं. पौधे की जड़ भूख बढ़ाने में भी सहायक होती है, जिससे कमजोर और दुबले पतले लोगों को फायदा मिलता है. परंपरागत इलाज में इस पौधे को वर्षों से महत्वपूर्ण औषधि के रूप में उपयोग किया जाता रहा है.