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साल 2001 हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक खास साल माना जाता है. इसी साल कई ऐसी फिल्में रिलीज हुईं, जिन्होंने बॉलीवुड की दिशा बदल दी. इनमें सबसे चर्चित नाम था आमिर खान स्टारर ‘लगान’. आज इस फिल्म को रिलीज हुए 25 साल पूरे हो चुके हैं. जानिए कैसे इस फिल्म के डायरेक्टर के लिए ये फिल्म ‘करो या मरो’ वाली थी. फिल्म रिलीज हुआ और फिर जो कमाल हुआ, वो देखने लायक था.
नई दिल्ली. बॉलीवुड में हर डायरेक्टर ये सोच के फिल्म की शुरुआत करता है कि वो बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाएंगी. लेकिन कभी ये सही साबित होता है और कभी सोच से परे. बॉलीवुड में डायरेक्टर्स की लंबी चौड़ी लिस्ट है. मनमोहन देसाई, यश चोपड़ा, सुभाष घई, रमेश सिप्पी , महेश भट्ट, संजय लीला भंसाली, करण जौहर, फराह खान और रोहित शेट्टी जैसे कई नाम हैं. इन सितारों ने बॉक्स ऑफिस पर हिट और ब्लॉकबस्टर का मीठा स्वाद चखा तो कभी उन्हें फ्लॉप फिल्मों का जहर भी पीना पड़ा. 25 साल पहले एक नामी डायरेक्टर का करियर खत्म होने का कगार पर था. एक के बाद एक 2 फ्लॉप देने के बाद उस डायरेक्टर का करियर चौपट होने की चौखट पर था. लेकिन रिस्क लिया और ऐसी फिल्म बना डाली, जिसने सिर्फ भारत में नहीं बल्कि दुनियाभर में नाम कमाया.
ये कहानी है जाने माने डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर की. साल 2001 उनके लिए जिंदगी बदल देने वाला साबित हुआ. दो बैक टू बैक फ्लॉप होने के बाद उन्होंने ये तय कर लिया था कि अगली फिल्म नहीं चली तो वह डायरेक्शन छोड़ देंगे. आलम ये था कि कहानी सुनकर फिल्म का हीरो और प्रोड्यूसर भी मान बैठे थे कि ये फिल्म फ्लॉप है. लेकिन आशुतोष गोवारिक ने हार नहीं मानी और महीनों तक स्क्रिप्ट पर काम किया और रिस्क लेकर जो फिल्म बनाई वो ब्लॉकबस्टर साबित हुई. इस किस्से का जिक्र उन्होंने खुद किया था. फोटो साभार-@ashutoshgowariker/Instagram
15 जून को बॉक्स ऑफिस पर दो ऐसी फिल्मों की टक्कर हुई थी, जो आज भी मिसाल मानी जाती हैं. एक तरफ थी अनिल शर्मा की ‘गदर: एक प्रेम कथा’ और दूसरी तरफ थी आशुतोष गोवारिकर की पीरियड स्पोर्ट्स ड्रामा ‘लगान’. ये दोनों फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने में कामयाब रही.
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‘स्क्रीन’ को दिए एक इंटरव्यू में आशुतोष गोवारिकर ने स्वीकार किया कि 90 के दशक के आखिरी सालों में वे बहुत बड़े दबाव में थे. आशुतोष गोवारिकर ने अपने करियर की शुरुआत एक एक्टर के रूप में की थी. उन्होंने मशहूर टीवी शो ‘सर्कस’ और फिल्म ‘कभी हां कभी ना’ जैसी फिल्मों में काम किया. इसके बाद उन्होंने डायरेक्शन की दुनिया में कदम रखा. उन्होंने साल 1993 में थ्रिलर फिल्म ‘पहला नशा’ बनाई, जिसमें दीपक तिजोरी, पूजा भट्ट और रवीना टंडन मुख्य भूमिकाओं में थे. इस फिल्म में आमिर खान और शाहरुख खान ने कैमियो भी किया था, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई. फोटो साभार-@ashutoshgowariker/Instagram
इसके बाद आशुतोष ने 1995 में आमिर खान के साथ एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘बाजी’ बनाई. यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को रिझाने में नाकाम रही. लगातार दो बड़ी असफलताओं के बाद आशुतोष के करियर पर सवालिया निशान लग चुके थे. बातचीत में उन्होंने कहा था, ‘मैं उस समय किसी कॉम्पेटिशन में नहीं था कि दूसरे फिल्ममेकर क्या बना रहे हैं. मुझे खुद को साबित करना था क्योंकि मेरी पिछली दो फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं. यह मेरा तीसरा और आखिरी मौका था.’ फोटो साभार-@ashutoshgowariker/Instagram
उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया था, ‘मैंने मन ही मन यह तय कर लिया था कि अगर मैं एक डायरेक्टर के रूप में ‘लगान’ से सफल नहीं हुआ तो मैं आगे कभी कोई फिल्म डायरेक्ट नहीं करूंगा. इसलिए मेरा पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ कहानी को सही करने पर था.’ शुरुआत में आमिर खान भी आशुतोष गोवारिकर के इस विचार से सहमत नहीं थे. एक गांव की पृष्ठभूमि पर क्रिकेट और देशभक्ति के ताने-बाने को बुनना एक बहुत बड़ा जोखिम था. आमिर खान ने अपने पुराने दोस्त आशुतोष को याद दिलाया था कि वे पहले ही दो फ्लॉप फिल्में दे चुके हैं, इसलिए उन्हें इस बार बेहद सतर्क रहने की जरूरत है. फोटो साभार-@ashutoshgowariker/Instagram
आशुतोष गोवारिकर ने लेकिन हार नहीं मानी. उन्होंने पूरे तीन महीने का समय लिया और ‘लगान’ की एक-एक बारीकी को ध्यान में रखकर स्क्रीनप्ले तैयार किया. जब उन्होंने दोबारा आमिर खान को स्क्रिप्ट सुनाई तो आमिर दंग रह गए. आशुतोष ने जिस तरह से फिल्म के हर एक किरदार जैसे भुवन, कचरा, लाखा आदि को पेश किया था, उसने आमिर का दिल जीत लिया. फोटो साभार-@ashutoshgowariker/Instagram
उस दौर में ‘लगान’ जैसी अनूठी फिल्म पर दांव लगाने के लिए कोई भी बड़ा प्रोड्यूसर तैयार नहीं था. फिल्म का बजट करीब 25 करोड़ रुपये था, जो उस समय के हिसाब से बहुत बड़ी रकम थी. दिग्गज लेखक जावेद अख्तर ने भी इस प्रोजेक्ट को एक बहुत बड़ा जुआ माना था, हालांकि बाद में उन्होंने ही इस फिल्म के सदाबहार गाने लिखे. जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो आमिर खान ने खुद इस फिल्म को प्रोड्यूस करने का फैसला किया. इसी फिल्म के साथ ‘आमिर खान प्रोडक्शंस’ की शुरुआत हुई. फोटो साभार- रेडिट
यह जुआ पूरी तरह से सही साबित हुआ. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस के सारे समीकरण बदल दिए और दुनिया भर में 65 करोड़ रुपये से अधिक की बम्पर कमाई की. इतना ही नहीं, साल 2002 में ‘लगान’ को ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म की श्रेणी में नॉमिनेशन पाया. फोटो साभार- रेडिट
अगर ‘लगान’ सफल न होती, तो भारतीय सिनेमा आशुतोष गोवारिकर की अन्य शानदार फिल्मों से महरूम रह जाता. इस फिल्म की सफलता के बाद ही वे शाहरुख खान के साथ ‘स्वदेश’ और ऋतिक रोशन-ऐश्वर्या राय स्टारर ‘जोधा अकबर’ जैसी बेहतरीन फिल्में बना पाए. फोटो साभार- रेडिट