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‘दृश्यम’, ‘मदारी’, ‘मुंबई मेरी जान’ और ‘फोर्स’ जैसी शानदार फिल्में बनाने वाले निर्देशक निशिकांत कामत ने कम समय में ही भारतीय सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ दी थी. अमिताभ बच्चन के जबरदस्त प्रशंसक रहे निशिकांत का सपना एक दिन बिग बी को डायरेक्ट करने का था, लेकिन यह ख्वाहिश अधूरी रह गई. 17 जून 1970 को जन्मे निशिकांत को 24 साल की उम्र में उन्हें निर्देशन का पहला मौका मिला था.
नई दिल्ली. हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने वाले निर्देशक, लेखक और अभिनेता निशिकांत कामत को आज भी उनकी शानदार फिल्मों के लिए याद किया जाता है. ‘दृश्यम’, ‘मदारी’, ‘मुंबई मेरी जान’ और ‘फोर्स’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई. उनकी फिल्मों की खासियत यह थी कि उनमें मनोरंजन के साथ समाज की सच्चाई और आम आदमी की भावनाएं भी नजर आती थीं. हालांकि एक सपना ऐसा था, जो उनकी जिंदगी में अधूरा रह गया. वह अमिताभ बच्चन को डायरेक्ट करना चाहते थे, लेकिन उन्हें यह मौका कभी नहीं मिला.
निशिकांत कामत का जन्म 17 जून 1970 को महाराष्ट्र के दादर में हुआ था. बचपन से ही उन्हें फिल्मों का बेहद शौक था. खासकर अमिताभ बच्चन के वह बहुत बड़े फैन थे और उनकी लगभग हर फिल्म देखते थे. पढ़ाई के दौरान उनका रुझान थिएटर की तरफ बढ़ा. दिलचस्प बात यह है कि वह एक बार सिर्फ नाटक की रिहर्सल देखने पहुंचे थे, लेकिन वहीं उन्हें मंच पर काम करने का मौका मिल गया. यहीं से उनके थिएटर सफर की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे यह शौक उनका जुनून बन गया.
महज 24 की उम्र में बने थे डायरेक्टर
थिएटर में काम करते-करते उनकी दिलचस्पी फिल्म निर्माण की तरफ बढ़ने लगी. करियर की शुरुआत उन्होंने दूरदर्शन के एक मराठी धारावाहिक में असिस्टेंट के तौर पर की. इसी दौरान उन्होंने एडिटिंग सीखी और महज 22 साल की उम्र में एडिटर बन गए. कुछ साल एडिटिंग करने के बाद 24 साल की उम्र में उन्हें निर्देशन का पहला मौका मिला. बाद में उन्होंने टीवी की दुनिया छोड़कर लेखन पर ध्यान दिया और कई साल तक स्क्रिप्ट लिखने का काम किया.
नेशनल अवॉर्ड से किया गया सम्मानित
साल 2005 में निशिकांत कामत ने मराठी फिल्म ‘डोम्बीवली फास्ट’ का निर्देशन किया. यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और इसे राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला. इस सफलता ने उन्हें मराठी सिनेमा के चर्चित निर्देशकों में शामिल कर दिया. मराठी फिल्मों में सफलता मिलने के बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा का रुख किया. साल 2008 में आई ‘मुंबई मेरी जान’ ने 2006 के मुंबई ट्रेन ब्लास्ट के बाद आम लोगों की जिंदगी पर पड़े असर को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाया. इसके बाद उन्होंने ‘फोर्स’, ‘दृश्यम’, ‘रॉकी हैंडसम’ और ‘मदारी’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया. खासतौर पर ‘दृश्यम’ ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई और यह उनके करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हो गई.
बता दें कि निशिकांत सिर्फ बेहतरीन निर्देशक ही नहीं थे, बल्कि एक अच्छे अभिनेता भी थे. उन्होंने ‘404’, ‘रॉकी हैंडसम’, ‘डैडी’, ‘जूली 2’ और ‘भावेश जोशी’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया. ‘रॉकी हैंडसम’ में निभाया गया उनका खलनायक का किरदार दर्शकों को खूब पसंद आया था. करियर में इतनी सफलता हासिल करने के बावजूद उनके दिल में एक ख्वाहिश हमेशा बाकी रही. वह अमिताभ बच्चन को अपनी फिल्म में डायरेक्ट करना चाहते थे. बचपन से जिनकी फिल्में देखकर उन्होंने सिनेमा को समझा, उनके साथ काम करना उनका सपना था. लेकिन यह सपना कभी पूरा नहीं हो सका. 17 अगस्त 2020 को निशिकांत कामत का निधन हो गया. वह लंबे समय से लिवर की बीमारी से जूझ रहे थे. महज 50 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. हालांकि उनकी फिल्में और उनका काम आज भी उन्हें दर्शकों के बीच जिंदा रखे हुए हैं.
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न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें