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Knee Pain In Young Age: आजकल 30-35 की उम्र में ही युवाओं को घुटनों में दर्द की शिकायत होने लगी है. ऐसे में दिल्ली के फेमस डॉक्टर पुनीत मिश्रा का कहना है कि गलत खानपान, घंटों बैठे रहना, बिना प्रिकॉशन के जिम ज्वॉइन कर लेना और मोटापा इसकी कुछ मुख्य वजहें हैं. उन्होंने इससे निपटने के तरीके भी बताए.
दिल्ली. एक समय था जब घुटनों का दर्द और जोड़ों की समस्या 60 साल की उम्र के बाद देखने को मिलती थी. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. आज 30 से 40 साल के युवा भी घुटनों के दर्द, अकड़न और कमजोरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठे रहना और शरीर की कम गतिविधि है.
फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग के ऑर्थोपेडिक्स डायरेक्टर डॉ. पुनीत मिश्रा के मुताबिक, आज की सुविधा भरी जिंदगी लोगों को धीरे-धीरे बीमार बना रही है. पहले लोग ज्यादा चलते थे और मेहनत करते थे, लेकिन अब हर काम के लिए गाड़ी, कैब और रिमोट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं. ऐसे में शरीर की गतिविधि कम होती जा रही है, जिसका असर सीधे घुटनों पर पड़ रहा है.
जिम का क्रेज, लेकिन गलत तरीका पड़ रहा भारी
आजकल फिटनेस के नाम पर अचानक जिम जॉइन करने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है. लेकिन बिना तैयारी और सही ट्रेनिंग के भारी वजन उठाना नुकसानदायक साबित हो सकता है. डॉ. मिश्रा के अनुसार, शरीर को पहले वर्कआउट के लिए तैयार करना जरूरी है. बिना वॉर्म-अप और बिना ट्रेनर की निगरानी में भारी एक्सरसाइज करने से घुटनों, लिगामेंट्स और मांसपेशियों में चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है.
इन शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर सीढ़ियां चढ़ते समय घुटनों में दर्द या असहजता महसूस हो, थोड़ा चलने या खड़े रहने में थकान होने लगे या छोटी-छोटी गतिविधियों में कमजोरी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉक्टरों का कहना है कि युवाओं में विटामिन D और विटामिन B12 की कमी भी तेजी से बढ़ रही है. धूप की कमी और खराब खानपान के कारण हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे जल्दी दर्द और थकान महसूस होती है.
मोटापा बढ़ा रहा जल्दी घुटना खराब होने का खतरा
डॉ. मिश्रा के मुताबिक, घुटने शरीर का वजन उठाने वाले सबसे अहम जोड़ होते हैं. अगर वजन तेजी से बढ़ता है और मांसपेशियां मजबूत नहीं होतीं, तो घुटनों पर ज्यादा दबाव पड़ता है. इससे घुटनों की कार्टिलेज जल्दी घिसने लगती है और आगे चलकर आर्थराइटिस या घुटना बदलने (नी रिप्लेसमेंट) जैसी नौबत भी आ सकती है.
क्या करें बचाव के लिए
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना कम से कम 40 से 45 मिनट तक कोई न कोई शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए. नियमित वॉक, हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, सही खानपान और पर्याप्त धूप बेहद जरूरी है. अगर नौकरी में लंबे समय तक बैठना पड़ता है, तो हर 20 मिनट में थोड़ा चलना, बीच-बीच में खड़े होकर काम करना और छोटे ब्रेक लेना फायदेमंद हो सकता है. साथ ही, डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना भी जरूरी है. डॉक्टरों का मानना है कि अगर समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव किए जाएं, तो घुटनों की गंभीर समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें