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कमल हासन ने हाल ही में अपनी क्लासिक फिल्म ‘पुष्पक’ को याद करते हुए कहा कि यह फिल्म केवल 15 लाख रुपये के बजट में बनी थी, लेकिन उसका प्रभाव और सफलता आज भी कायम है. अभिनेता का मानना है कि अगर यह फिल्म आज रिलीज होती, तो 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार कर सकती थी. उन्होंने कहा कि पहले फिल्में जुनून, कहानी और कला के लिए बनाई जाती थीं, जबकि आज बॉक्स ऑफिस कमाई को ज्यादा महत्व दिया जाता है.
फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिला था.
नई दिल्ली. भारतीय सिनेमा की सबसे अनोखी और एक्सपेरिमेंटल फिल्मों में गिनी जाने वाली ‘पुष्पक’ आज भी दर्शकों और फिल्मकारों के बीच खास जगह रखती है. बिना किसी डायलॉग के बनी इस फिल्म ने रिलीज के समय न केवल दर्शकों को चौंकाया था, बल्कि यह साबित भी किया था कि दमदार कहानी और बेहतरीन प्रस्तुति किसी भी भाषा की सीमाओं से परे होती है. अब फिल्म के अभिनेता कमल हासन ने ‘पुष्पक’ को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है.
निर्देशक सिंगीथम श्रीनिवास राव की अपकमिंग फिल्म ‘सिंग गीतम’ के प्री-रिलीज कार्यक्रम में पहुंचे कमल हासन ने अपने करियर की इस यादगार फिल्म को याद किया. बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि ‘पुष्पक’ उस दौर की फिल्मों में से थी, जिसे मुनाफे के बजाय रचनात्मक सोच और सिनेमा के प्रति प्रेम के साथ बनाया गया था.
अपनी कालजयी फिल्म पर क्या बोले कमल हासन
कमल हासन ने कहा कि जब ‘पुष्पक’ का निर्माण किया जा रहा था, तब टीम के सामने बॉक्स ऑफिस कलेक्शन या कमाई के आंकड़ों का दबाव नहीं था. फिल्म बनाने वालों का पूरा ध्यान केवल एक अलग और प्रभावशाली कहानी को पर्दे पर उतारने पर था. उनके मुताबिक, उस समय फिल्में पहले कला और जुनून के लिए बनती थीं, जबकि व्यावसायिक सफलता बाद में अपने आप मिल जाती थी.
15 लाख रुपये में बनी थी फिल्म
अभिनेता ने फिल्म के बजट का जिक्र करते हुए बताया कि ‘पुष्पक’ बेहद सीमित संसाधनों में तैयार की गई थी. उन्होंने कहा कि फिल्म को लगभग 15 लाख रुपये के बजट में बनाया गया था, लेकिन उसका प्रभाव और लोकप्रियता इतनी बड़ी थी कि आज भी लोग उसे याद करते हैं. कमल का मानना है कि अगर यही फिल्म आज के दौर में रिलीज होती, तो इसकी कमाई आसानी से 200 करोड़ रुपये या उससे अधिक हो सकती थी.
‘मेकर्स पर नहीं था आंकड़ों का दबाव’
उन्होंने मौजूदा फिल्म इंडस्ट्री के काम करने के तरीके पर भी टिप्पणी की. कमल हासन के अनुसार, आज अधिकतर फिल्मों की योजना बनाते समय सबसे पहले उनकी संभावित कमाई पर चर्चा होती है, जबकि पहले कहानी और रचनात्मकता को प्राथमिकता दी जाती थी. उनका कहना है कि सिनेमा का असली मूल्य केवल बॉक्स ऑफिस आंकड़ों से तय नहीं किया जा सकता, क्योंकि कुछ फिल्में अपनी कमाई से कहीं ज्यादा सांस्कृतिक और कलात्मक महत्व रखती हैं.
इस दौरान कमल हासन ने निर्देशक सिंगीथम श्रीनिवास राव की भी जमकर सराहना की. उन्होंने कहा कि राव हमेशा अपने समय से आगे की सोच रखने वाले फिल्मकार रहे हैं और 94 वर्ष की उम्र में भी उनका उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा प्रेरणादायक है. कमल ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह आज भी उनके सहायक निर्देशक बनकर उनसे सीखना पसंद करेंगे.
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From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें