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बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर सनातन संस्कृति और धार्मिक चेतना के एक ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बनी. राष्ट्रीय महाकाल सेना के स्थापना दिवस पर आयोजित भव्य भजन संध्या में बहुप्रतीक्षित धार्मिक ज्ञान आधारित शो ‘कौन बनेगा ज्ञानरत्न’ के टीज़र का भव्य लोकार्पण किया गया. इस अवसर पर धर्म, संस्कृति और भारतीय परंपराओं के संरक्षण का संदेश भी दिया गया.
जल्द आ रहा है कौन बनेगा ज्ञानरत्न
उज्जैन. आपने कौन बनेगा करोड़पति देखा होगा. उसमें लोगों को देश-दुनिया में होने वाले हर सवालों के जवाब देते देखा होगा. लेकिन अब धर्म और संस्कृति को जोड़ने और उसके ज्ञान को बढ़ाने के लिए शुरू होने जा रहा है. ‘कौन बनेगा ज्ञानरत्न’ जिसमें 11 लाख रुपए जीतने का मौका मिलेगा और 15 सवाल का जवाब देना होगा.
उज्जैन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं और साधु संत की मौजूदगी के बीच ‘कौन बनेगा ज्ञानरत्न’ के टीज़र का अनावरण किया गया. शो के निर्माता श्रिपाल रेड्डू और पवन घल्याण (मामा) ने बताया कि यह मंच केवल एक क्विज प्रतियोगिता नहीं, बल्कि रामायण के ज्ञान, भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है.
सनातन परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास
कार्यक्रम में मौजूद धर्म प्रेमियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि आधुनिक दौर में युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए ऐसे नए काम बेहद आवश्यक हैं. शो के माध्यम से रामायण के प्रसंगों, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन मूल्यों और सनातन परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
घर-घर पहुंचेगा रामायण का ज्ञान
इस आयोजन में इंदौर की पीआर और स्पोर्ट टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. लाइन प्रोड्यूसर एडवोकेट आनंद यादव ‘गोविंदा’ और उनकी टीम ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया. आयोजकों ने इसे सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया.
कौन बनेगा ज्ञानरत्न के माध्यम से हमारा प्रयास है कि रामायण का ज्ञान घर-घर पहुंचे और युवा पीढ़ी अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ सके. उज्जैन से इस महाअभियान की शुरुआत हमारे लिए गर्व का विषय है.
राष्ट्रीय महाकाल सेना के पदाधिकारियों ने कहा कि उज्जैन केवल एक धार्मिक शहर नहीं बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है. ऐसे में इस पवित्र नगरी से शुरू हुआ यह ज्ञान अभियान देशभर में धर्म, ज्ञान और संस्कारों की नई अलख जगाने का काम करेगा. भक्ति, संस्कृति और ज्ञान के संगम बने इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि आधुनिक माध्यमों के जरिए भी सनातन मूल्यों को प्रभावी ढंग से समाज तक पहुंचाया जा सकता है. अब देखना होगा कि ‘कौन बनेगा ज्ञानरत्न’ देशभर के दर्शकों के बीच कितनी बड़ी पहचान बनाता है.
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