विकास झा/फरीदाबाद: पहले रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं ज्यादातर बुजुर्गों में देखने को मिलती थीं…लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. भारी स्कूल बैग, घंटों मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल, खेलकूद से दूरी और लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करना बच्चों और युवाओं की रीढ़ की हड्डी पर भारी पड़ रहा है. अस्पतालों में कम उम्र के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. आखिर इस बीमारी की वजह क्या है इससे कैसे बचा जा सकता है और इसका इलाज क्या है आइए जानते हैं विशेषज्ञ की राय.
छोटे बच्चों में बैक प्रॉब्लम
Local18 से बातचीत में फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के स्पाइन सर्जरी विभाग में कार्यरत स्पाइन स्पेशलिस्ट डॉ. तरुण सूरी बताते हैं मैं देख रहा हूं आजकल हमारे पास बहुत सारे बच्चे बैक प्रॉब्लम लेकर आ रहे हैं. पहले यह समस्या बुजुर्गों या फिर युवाओं में ज्यादा होती थी लेकिन अब छोटे बच्चों में भी देखने को मिल रही है. इसका सबसे बड़ा कारण खराब पोस्चर और बदलती लाइफस्टाइल है. बच्चे काफी देर तक डेस्क और कुर्सी पर बैठे रहते हैं. फिजिकल एक्टिविटी बहुत कम हो गई है. खेलकूद की जगह मोबाइल और लैपटॉप पर गेम खेलने का चलन बढ़ गया है. इसके अलावा पढ़ाई का तनाव भी बढ़ा है. स्कूलों में बच्चों को भारी बैग उठाने पड़ते है जिससे कमर पर दबाव पड़ता है.
क्या है वजह
डॉ. तरुण सूरी बताते हैं आजकल बच्चों का न्यूट्रिशन भी बहुत खराब हो गया है. खानपान में संतुलन की कमी है. बच्चे फास्ट फूड ज्यादा खाते हैं और हेल्दी फूड कम लेते हैं. फिजिकल एक्टिविटी कम होना स्कूल बैग का ज्यादा वजन और पौष्टिक भोजन की कमी जैसी वजहों से रीढ़ की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं.
डॉ. तरुण सूरी बताते हैं ऑफिस में काम करने वाले लोग आठ से नौ घंटे तक लगातार बैठे रहते हैं. ज्यादा देर तक बैठना स्मोकिंग जितना खतरनाक माना जाता है. लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है और डिस्क जल्दी खराब होने लगती है. युवाओं में नौकरी के दौरान लंबे समय तक बैठकर काम करना उनकी डिस्क को नुकसान पहुंचा रहा है.
क्या है सही इलाज
डॉ. तरुण सूरी बताते हैं कोविड के बाद एक बड़ा बदलाव आया है. वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ गया है. घर में लोग बेड या सोफे पर खराब पोस्चर में बैठकर लंबे समय तक काम करते हैं जिसका असर कमर और डिस्क पर पड़ता है. मैं सलाह दूंगा कि लगातार लंबे समय तक न बैठें. हर 20 से 25 मिनट बाद एक से दो मिनट का ब्रेक लें और हल्का योग या स्ट्रेचिंग करें, ताकि मांसपेशियां मजबूत बनी रहें.
रोजाना कम से कम एक घंटा फिजिकल एक्टिविटी जरूर करें
डॉ. तरुण सूरी बताते हैं बच्चों के लिए मैं यही कहूंगा वे रोजाना कम से कम एक घंटा फिजिकल एक्टिविटी जरूर करें. बाहर जाकर खेलें-कूदें. इससे बैक मसल्स मजबूत रहती हैं और रीढ़ की समस्याओं का खतरा कम होता है. बुजुर्गों में समस्या अलग होती है. उनमें डिस्क की दिक्कत के साथ मांसपेशियां भी कमजोर होने लगती हैं. हड्डियों को मजबूत रखने के लिए समय-समय पर डेक्सा स्कैन करवाना चाहिए. जरूरत पड़ने पर कैल्शियम और उसके सप्लीमेंट लेने चाहिए. बुजुर्गों को स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज भी करनी चाहिए, ताकि गिरने और फ्रैक्चर का खतरा कम हो सके.
डॉ. तरुण सूरी बताते हैं मैं स्पाइन स्पेशलिस्ट हूं और मेरे पास आने वाले लगभग 99 से 100 प्रतिशत मरीज स्पाइन से जुड़ी समस्याओं के होते हैं. पहले यह परेशानी 40 से 50 साल की उम्र में ज्यादा देखने को मिलती थी, लेकिन अब 20 साल की उम्र के युवाओं में भी स्पाइन की समस्याएं सामने आ रही हैं.
मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम करें
डॉ. तरुण सूरी बताते हैं आजकल बच्चे मोबाइल में ज्यादा समय बिताते हैं. इसका असर सिर्फ कमर ही नहीं बल्कि गर्दन पर भी पड़ता है. मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए. फोन को नीचे झुकाकर देखने के बजाय सामने की ऊंचाई पर रखें. लैपटॉप पर काम करते समय उसकी ऊंचाई बढ़ाएं या फिर डेस्कटॉप का इस्तेमाल करें ताकि गर्दन पर दबाव कम पड़े. मोबाइल या लैपटॉप का लगातार इस्तेमाल न करें और बीच-बीच में ब्रेक जरूर लें क्योंकि लगातार उपयोग से इसके दुष्प्रभाव बढ़ सकते हैं.