Benefits Of Sit Ups: ऑफिस की डेस्क पर घंटों बैठे रहने और फिजिकल एक्टिविटी कम होने की वजह से हमारा शरीर धीरे-धीरे बीमारियों का घर बनने लगता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की मानें, तो 18 से 64 साल के वयस्कों को हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की मॉडरेट या 75 मिनट की हैवी एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए. वैसे तो फिट रहने के लिए कई तरह के वर्कआउट हैं, लेकिन एक ऐसी बेसिक एक्सरसाइज है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं और वह है सिट-अप्स (Sit-ups). अगर आप भी इसे सिर्फ ‘एब्स’ बनाने की एक्सरसाइज समझते हैं, तो आप इसके बाकी फायदों से अनजान हैं. आइए जानते हैं कि क्यों सिट-अप्स को आज ही से आपके वर्कआउट रूटीन का हिस्सा होना चाहिए.
सिट-अप्स मारने के फायदे(Benefits Of Sit Ups )-
कोर स्ट्रेंथ को बनाता है फौलादी
सिट-अप्स का सीधा असर आपके पेट की मांसपेशियों (Rectus Abdominis) पर पड़ता है, जिससे सिक्स-पैक एब्स टोन होते हैं. लेकिन यह सिर्फ दिखावे के लिए नहीं है; यह आपके पेट की गहरी मांसपेशियों (Transverse Abdominis) और साइड्स (Obliques) को भी मजबूत करता है. एक मजबूत कोर आपके पूरे शरीर की ताकत बढ़ाता है, जिससे भारी सामान उठाना, दौड़ना या बच्चों के पीछे भागना बेहद आसान हो जाता है.
खराब पोश्चर (Posture) से दिलाए मुक्ति
घंटों कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करने से हमारे कंधे झुक जाते हैं और रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर पड़ता है. सिट-अप्स इस समस्या का रामबाण इलाज हैं. यह आपकी हिप्स, स्पाइन और अपर बॉडी को एक सही अलाइनमेंट में लाता है. जब आपकी पीठ और पेट मजबूत होते हैं, तो आप सीधे खड़े होते हैं, जिससे गर्दन का दर्द कम होता है और फेफड़ों को खुलकर ऑक्सीजन मिलती है.
चोट लगने का खतरा करे कम
कमजोर कोर की वजह से अक्सर पीठ या कमर में अचानक झटका लग जाता है. सिट-अप्स करने से आपकी पेल्विस (कमर का निचला हिस्सा) और रीढ़ की हड्डी को स्थिरता मिलती है. यह मांसपेशियों के बीच एक बेहतरीन बैलेंस बनाता है, जिससे वर्कआउट के दौरान या अचानक होने वाले मूवमेंट में चोट (Injury) लगने का रिस्क बहुत कम हो जाता है.
स्पोर्ट्स और एथलेटिक परफॉर्मेंस में सुधार
अगर आप रनिंग, साइकलिंग या हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट (HIIT) करते हैं, तो सिट-अप्स आपके लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं. यह एक्सरसाइज आपके शरीर को बिना डगमगाए एक जगह स्थिर रखना सिखाती है. इससे आपकी सहनशक्ति (Endurance) बढ़ती है और आप बिना जल्दी थके लंबे समय तक वर्कआउट या कोई भी खेल खेल सकते हैं.
बॉडी बैलेंस और डेली लाइफ को बनाए आसान
सिट-अप्स आपके दिमाग और मांसपेशियों के तालमेल (Proprioception) को बेहतर करते हैं. जब पेट और पीठ की मांसपेशियां एक साथ काम करती हैं, तो शरीर का संतुलन बेहतरीन हो जाता है. यह बैलेंस आपको योग के कठिन आसन करने, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने या रोजमर्रा के काम जैसे एक हाथ में भारी ग्रोसरी का थैला उठाकर भीड़ में चलने में मदद करता है.
फ्लेक्सिबिलिटी (Flexibility) और मोबिलिटी बढ़ाए
लगातार बैठे रहने से हमारे हिप फ्लेक्सर्स (कमर के जोड़ की मांसपेशियां) टाइट हो जाते हैं, जिससे लोअर बैक पेन शुरू हो जाता है. जब आप सिट-अप्स करते हैं, तो रीढ़ की हड्डी के झुकाव से इन मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे पेट और पीठ की जकड़न दूर होती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है.
कैसे करें शुरुआत?
अगर आप बिगिनर हैं, तो हफ्ते में 3 दिन 10 से 15 सिट-अप्स के 3 सेट्स से शुरुआत करें. धीरे-धीरे जब आपकी स्ट्रेंथ बढ़ने लगे, तो आप इसे बढ़ाकर 20 से 30 रेप्स तक ले जा सकते हैं. याद रखें, फिटनेस का नियम है कि आप कितने ज्यादा सिट-अप्स कर रहे हैं, इससे ज्यादा जरूरी यह है कि आप सही फॉर्म और तरीके से कर रहे हैं या नहीं.
तो देर किस बात की? आज ही से अपने वर्कआउट में सिट-अप्स को शामिल करें और एक हेल्दी, फिट और एनर्जेटिक लाइफस्टाइल की तरफ अपना कदम बढ़ाएं!(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)