बाल हनुमानजी के बचपन के कई किस्से हैं। इसमें से कुछ का उल्लेख शास्त्रों में मिलता है और कुछ लोककथाओं में प्रचलित है। इस बार आप पढ़िये बाल हनुमानजी के उड़ना सिखने की रोचक कहानी।
बालपन में बाल हनुमान जी ऋषि मातंग के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने जाते थे। वहाँ वे अक्सर ऋषियों के सारे फल खा जाते और उन्हें खूब परेशान करते थे।
एक बार फलों के बाग में उन्होंने इंद्र के पुत्र जयंत और सूर्य के पुत्र शनिदेव को हवा में उड़ते देखा, जिसे देखकर वे बहुत आश्चर्यचकित हुए।
देव-पुत्रों को इस तरह हवा में उड़ता देखकर बाल हनुमान ने भी ठान लिया कि वे भी आकाश में उड़ना सीखकर ही रहेंगे।
हनुमान जी ने खूब उछलकर उड़ने की कोशिश की, लेकिन वे बार-बार नीचे गिर पड़ते थे। यह देखकर जयंत और शनिदेव उन पर जोर-जोर से हंसने लगे।
कड़ी कोशिश के बाद भी जब बाल हनुमान नहीं उड़ पाए, तो वे उदास हो गए। तभी वहाँ पवनदेव प्रकट हुए और बोले, “निराश न हो पुत्र, मैं तुम्हें उड़ना सिखाऊंगा।”
पवनदेव ने हनुमान जी को हवा में उड़ने की दिव्य कला सिखाई। देखते ही देखते हनुमान जी खुशी से आसमान में बहुत ऊंची उड़ान भरने लगे।
इसी के साथ बाल हनुमान जी की दिव्य और अनंत शक्तियों की शुरुआत हुई और वे बादलों से भी ऊंची उड़ान भरने लगे। बोलो, जय वीर हनुमान!