How To Stop Negative Thoughts: हमारे साथ कभी कोई हादसा या बुरा अनुभव होता है तो वह हमारे अवचेतन मन में इस कदर से बैठ जाता है कि उसे भूलना नामुमकिन जैसा हो जाता है. कभी कभी स्थिति ऐसी भी हो जाती है कि हम सपने भी वैसे ही देखने लगते हैं. मन में बैठा डर हमेशा डराता है, निगेटिव थॉट्स जिंदगी की चलती हुई गाड़ी पर ब्रेक से लगा देते हैं. हम उससे बाहर ही नहीं आ पाते. ऐसे ही कुछ लोगों में अपने व्यक्तित्व को लेकर हीन भावना होती है, जो उनके आत्मविश्वास को तोड़ देती है. उनको अपनी क्षमताओं पर भरोसा नहीं होता. अपने निगेटिव थॉट्स हर काम में आड़े आते हैं और वह उस तरीके से काम नहीं कर पाता, जितनी उसकी क्षमताएं हैं. इन निगेटिव थॉट्स को कैसे कंट्रोल कर सकते हैं या फिर उसे खत्म कर सकते हैं?
मन के बुरे अनुभवों को कैसे करें दूर?
डॉ. मैक्सवेल माल्ट्ज़ की किताब द न्यू साइको साइबरनेटिक्स: द साइंस आफ सेल्फ इंप्रूवमेंट में बताया गया है कि हमारा दिमाग वर्तमान समय में काम करता है. यदि आप अपने दिमाग को एक तर्कसंगत कारण या सोच देते हैं, तो वे मन के पुराने डर या कड़े अनुभवों को खत्म करने में मदद करते हैं. यह ठीक ऐसे ही है कि आप अपने पुराने कड़े अनुभवों या डर की खुदाई करें.
इसका सबसे आसान तरीका है कि आपके मन में जो डर बैठा है, उसे एक सफेद कागज पर स्पष्ट रूप से लिख लें. उसके बाद अब आप ईमानदारी से विचार करें कि यह वास्तव में डर है या किसी की कही या सुनी हुई बातें. इसमें आपकी कितनी गलती थी, किसी ने गलती की है तो उसका कारण क्या था? कई बार हम दूसरे के व्यवहार और गलतियों की वजह से डरे होते हैं, या उसे माफ नहीं कर पाते और मन में प्रतिशोध की भावना रखते हैं. जब आप उसे माफ कर दें या अपने डर का तर्कसंगत कारण अपने दिमाग को बता दें, उसे यह प्रमाण दे दें कि जो डर या पुरानी सोच थी, वो गलत थी, तो आपका वर्तमान दिमाग उसे स्वीकार कर लेता है और आपके पुराने ख्यालों को खत्म करने लगता है. इस तरह से आपका दिमाग नई अवधारणा से अपडेट हो जाता है और डरावनी बातें या निगेटिव थॉट्स को दूर कर देता है.
निगेटिव थॉट्स दूर करने का आसान उपाय
डॉ. मैक्सवेल माल्ट्ज़ ने अपनी इस किताब में एक सेल्समैन की उदाहरण दिया है. वो हमेशा निगेटिव थॉट्स से भरा रहता था. उसे लगता था कि दुनिया की सबसे बुरी चीजें या घटनाएं उसके साथ ही होती हैं. उसे अपने चेहरे को लेकर भी हीन भावना थी. वो चाहता था कि प्लास्टिक सर्जरी से उसके चेहरे को ठीक किया जाए.
एक दिन वह प्लास्टिक सर्जरी के लिए डॉक्टर के पास पहुंचा. प्लास्टिक सर्जरी के लिए दिन और समय तय कर दिया गया. वह सेल्समैन डॉक्टर के पास आया तो उस दिन डॉक्टर ने कहा कि 15 दिन का एक अभ्यास है, उसे करना है, तभी प्लास्टिक सर्जरी हो पाएगी.
डॉक्टर ने कहा कि आपके दिमाग में जब भी कोई हीन भावना या निगेटिव थॉट आए तो आपको कैंसिल कहना है. यह ठीक वैसे ही है, जैसे आपके फोन में कोई ऐसा मैसेज आए, जिसे आप पसंद नहीं करते हैं और उसे आप डिलीट कर देते हैं. यह कम 15 दिनों तक करना है.
उस सेल्समैन ने वैसा ही किया. 15 दिनों तक जब भी उसके मन में कोई निगेटिव थॉट आता तो वो उसे कैंसिल कह देता था. इससे उसके दिमाग में नकारात्मक चीजें आने से पहले ही खत्म हो जाती थीं, 15वें दिन जब वो डॉक्टर के पास आया तो उसे प्लास्टिक सर्जरी कराने की जरूरत ही महसूस नहीं हुई. वह अपने काम में पहले से बेहतर प्रदर्शन करने लगा था क्योंकि उसका दिमाग निगेटिव थॉट्स को स्वीकार करना बंद कर दिया था.
यदि आपके भी मन में हमेशा निगेटिव थॉट्स आते हैं तो आप इस उपाय को आजमा करके देख सकते हैं. इससे आपको सकारात्मक बदलाव महसूस हो सकते हैं.