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Acidity vs Chest Pain: जाने-माने शूटर जसपाल राणा का मात्र 49 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्हें जर्मनी में छाती में दर्द हुआ था लेकिन उन्हें लगा कि यह एसिडिटी है. इसके बाद वे लंबे हवाई सफर से दिल्ली आए और एयरपोर्ट से अस्पताल गए जहां उनका निधन हो गया. उनकी एक छोटी सी भूल जानलेवा बन गई. इसलिए हमने मेदांता अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट डॉ.आकाश विजय से यह जानना चाहा कि छाती के दर्द और एसिडिटी में अंतर को कैसे पहचानें.
छाती में दर्द और एसिडिटी वाले दर्द में क्या अंतर है.
Acidity vs Chest Pain: हम सब में से अधिकांश लोगों को यह पता नहीं होता है कि कौन सा दर्द छाती का होता है और कौन सा एसिडिटी का. इसलिए अक्सर इस कारण लोगों की जानें चली जाती है. मशहूर शूटर जसपाल राणा इसका ताजा उदाहरण हैं. जसपाल राणा जर्मनी के म्यूनिख में एक कार्यक्रम के लिए गए थे. वहीं पर उन्हें छाती में दर्द हुआ था. उन्हें लगा कि यह मामूली एसिडिटी है. वे इसके बावजूद फ्लाइट से दिल्ली आ गए. रास्ते से ही उन्हें तकलीफ शुरू हो गई. दिल्ली एयरपोर्ट से सीधे उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन वे बच नहीं सके. उन्हें हार्ट संबंधी परेशानी पहले से थी. एक स्टेंट पहले लग चुका था. दूसरे के लगाए जाने की डेट नजदीक आ रही थी. इसके बावजूद उन्होंने छाती में दर्द को पहचानने में भूल कर दे और देखते-देखते यह दर्द जानलेवा बन गया. ऐसे में हमें यह पता रहना चाहिए कि एसिडिटी और हार्ट अटैक वाले दर्द में क्या अंतर है. इसके लिए हमने मेदांता अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट डॉ.आकाश विजय से बात की.
क्या रहा होगा कारण
डॉ. आकाश विजय ने बताया कि कोई भी दर्द अगर अचानक आए तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. जसपाल राणा के केस में असली वजह क्या है यह तो उनके डॉक्टर ही बता पाएंगे लेकिन इसमें सबसे ज्यादा इस बात की आशंका हैं कि दिल तक खून को पहुंचाने वाली आर्टरीज में ब्लॉकेज हो गया होगा. जैसा कि उन्हें पहले से ही एक स्टेंट लगा हुआ था और एक और लगाने की तैयारी थी. इस कंडीशन में स्टेंट वाले आर्टरीज में भी दोबारा से ब्लॉकेज हो सकता है या अन्य किसी भी आर्टरीज में ब्लॉकेज हो सकता है. चूंकि उनमें पहले से ब्लॉकेज हो रखा था. इसलिए उनकी आर्टरीज में 70-80 प्रतिशत प्लैक पहले से बना हुआ था. इस कंडीशन में यही प्लैक सौ फीसदी तक पहुंच गया होगा और अचानक आर्टरीज को बंद कर दिया होगा. दूसरी स्थिति यह हो सकती है कि इन ब्लॉकेज के कारण खून का थक्का बन गया होगा और खून की नली फट गई होगी जिससे आगे खून जाना बंद हो गया होगा और अचानक हार्ट अटैक आ गया होगा.
हार्ट वाले दर्द को कैसे पहचानें
अब यह समझते हैं कि एसिडिटी और हार्ट वाले दर्द को कैसे पहचानें. डॉ. आकाश विजय ने बताया कि हार्ट अटैक वाले दर्द को थोड़ी सी सावधानी से आसानी से पहचाना जा सकता है. अगर दर्द अचानक आया हो, तेज हो, छाती में जकड़न जैसा महसूस हो, जलन जैसा महसूस हो, अगर लगे कि छाती पर बहुत ज्यादा भार हो गया है, छाती को कोई बहुत जोर से दबा रहा है, छाती में बहुत कसाव हो गया तो इस बात की ज्यादा आशंका है कि यह हार्ट वाला दर्द है. इस मामले में तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. इस दर्द के अलावा अगर जी मिचला रहा हो, पेट के उपरी हिस्से में दर्द हो, चक्कर जैसा महसूस हो, सांस फूल रहा हो या सीने में तकलीफ हो रहा हो, सिर हल्का लग रहा हो, बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी हो, जलन जैसा महसूस हो, गले में जलन हो, जबड़े में दर्द हो, कंधे में दर्द हो, धड़कनें बहुत ज्यादा आगे-पीछे करने लगे, आंखों के सामने अंधेरा हो जाए तो यह सीने का दर्द हो सकता है. इनमें से एक भी लक्षण दिख सकता है और एक साथ कई लक्षण दिख सकता है. इसलिए ऐसे लक्षणों में तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए.
एसिडिटी वाले दर्द को कैसे पहचानें
एसिडिटी का मतलब पेट के एसिड का उपर की उठ जाना. एसिडिटी वाला दर्द अक्सर खाने के बाद होता है. इसमें छाती में जलन जैसा महसूस होता है. जब एसिडिटी वाला दर्द होता है तो लेटने पर या आगे झुकने पर यह समस्या बढ़ जाती है. अगर बिस्तर पर लेटने से दो घंटे पहले भी भोजन किया है तो नींद में भी एसिडिटी वाला दर्द आपको उठा सकता है. दर्द इतना तेज होगा कि नींद से जागना पड़ेगा. एसिडिटी वाले दर्द में जैसे ही आप एंटासिड दवाइयां लेंगे इससे तुरंत राहत मिल सकती है, कुछ देर में आराम मिलने लगेगा लेकिन हार्ट वाले दर्द में आराम नहीं मिलेगा. एसिडिटी होगा तो मुंह में खट्टा स्वाद जैसा महसूस होगा. अगर लेटेंगे तो ज्यादा होगा. कभी-कभी थोड़ा कुछ खाएंगे तो लगेगा गले के पीछे तक कुछ आ गया है. ये सारे लक्षण एसिडिटी के हो सकते हैं.
हार्ट वाले दर्द से कैसे बचें
डॉ. आकाश विजय कहते हैं कि हार्ट की अधिकांश समस्याओं का पता पहले से नहीं चलता न ही इसके कोई लक्षण पहले दिखता है. इसलिए इसका एक ही निदान है कि आप समय-समय पर डॉक्टरों की सलाह से जांच कराएं. अगर किसी भी तरह से छाती में जकड़न वाला दर्द हो, सीढ़ियां चढ़ते हुए दिक्कत हो, सांस फूल रहा हो, सांस लेने में दिक्कत हो, एंजाइना हो, बहुत ज्यादा घबराहट हो, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर से दिखाएं. 30 साल के बाद साल में एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर कराएं और डॉक्टरों से सलाह लें.
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18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें