भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का लाभांश देने की घोषणा की है। केन्द्र को आरबीआई से मिलने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा लाभांश है।
रिजर्व बैंक केंद्र को देगा रेकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का लाभांश
कच्चे तेल में तेजी के बीच सरकार को राजस्व घाटा कम करने में मिलेगी मदद
मुंबई।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का लाभांश देने की घोषणा की है। केन्द्र को आरबीआई से मिलने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा लाभांश है। यह फैसला आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया। बढ़ती शुद्ध आय और मजबूत वित्तीय स्थिति के बीच यह राशि सरकार को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत दे सकती है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की शुक्रवार को हुई बोर्ड बैठक में सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का रेकॉर्ड डिविडेंड देने का निर्णय लिया गया। यह वित्त वर्ष 2026-27 के लिए है। यह डिविडेंड पिछले वित्त वर्ष (2024-25) के 2.69 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 6.7 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि, केन्द्र सरकार को 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डिविडेंड की उम्मीद थी। 31 मार्च 2026 तक RBI की बैलेंस शीट 20.61% बढ़कर 91.97 लाख करोड रुपये की हो गई है।
RBI के सेंट्रल बोर्ड ने मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए कंटिंजेंट रिस्क बफर (मुश्किल वक्त के लिए सुरक्षित फंड यानी CRB) में 1,09,379.64 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की मंजूरी दी है। पिछले साल यह रकम 44,861.70 करोड़ रुपये थी। इस बार बोर्ड ने इस रिस्क बफर को बैलेंस शीट के 6.5% पर रखने का फैसला किया है।
आरबीआई का 2.86 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड सरकार के लिए राहत की खबर है। पहले कभी केंद्रीय बैंक ने केंद्र सरकार को इतना डिविडेंड नहीं दिया था। यह डिविडेंड ऐसे वक्त मिला है जब क्रूड ऑयल में उछाल से सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण बढ़ रहे आयात बिल और सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों के बीच सरकारी खजाने के लिए यह पैसा एक बड़े बूस्टर का काम करेगा।
“मनी कंट्रोल” की रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई से मिले लाभांश से केन्द्र सरकार को जनहित के निम्न कार्यों में मदद मिलेगी –
1. वेल्फेयर स्कीम पर सरकार ज्यादा खर्च कर सकेगी
आरबीआई से मिला डिविडेंड सरकार के नॉन-टैक्स रेवेन्यू का हिस्सा है। ज्यादा डिविडेंड मिलने से सरकार के हाथ में वेल्फेयर स्कीम पर खर्च करने के लिए पर्याप्त पैसे होंगे। खासकर ऐसे वक्त में यह बहुत अहम है, जब क्रूड की कीमतों में उछाल से सरकार का इंपोर्ट बिल बढ़ा है।
2. सरकार कैपिटल एक्सपेंडिचर का टारगेट पूरा कर सकेगी
सरकार ने इस वित्त वर्ष में कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत खर्च के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का टारगेट तय किया है। आरबीआई के डिविडेंड से सरकार को कैपिटल एक्सपेंडिचर का टारगेट पूरा करने में आसानी होगी। इसका मतलब है कि सरकार सड़क, रेलवे, मेट्रो जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा पैसे खर्च करेगी। इससे रोजगार के मौके बढ़ेंगे।
3. सरकार को बाजार से कम कर्ज लेना पड़ेगा
सरकार का खर्च उसकी इनकम से ज्यादा रहता है। इस वजह से हर वित्त वर्ष में सरकार को उधार लेना पड़ता है। इनकम और खर्च का अंतर जितना ज्यादा रहता है, सरकार को उतना ज्यादा उधार लेना पड़ता है। सरकार के ज्यादा उधार लेने का असर इंटरेस्ट रेट पर पड़ता है। इससे लोन महंगा हो जाता है। इसका असर न सिर्फ कंपनियों पर पड़ता है बल्कि आम आदमी को भी होम लोन और कार लोन के लिए ज्यााद इंटरेस्ट चुकाना पड़ता है।
4. शेयर बाजार का सेंटीमेंट बेहतर होगा
आरबीआई ने डिविडेंड का ऐलान शेयर बाजार बंद होने के बाद किया। इस डिविडेंड का असर 25 मई को शेयर बाजार पर दिखेगा। पिछले साल डिविडेंड के ऐलान के बाद शेयर बाजार में तेजी आई थी। इस बार भी बाजार पर इसका पॉजिटिव असर पड़ने की उम्मीद है। यह पहले से दबाव में चल रहे शेयर बाजार के लिए संजीवनी जैसा होगा। इससे शेयरों की कीमतों में तेजी आएगी, जिससे रिटेल इनवेस्टर्स को राहत मिलेगी।
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