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Real Life Gangster Movies Bollywood : रियल लाइफ गैंगस्टर की पर्सनल लाइफ पर बेस्ड फिल्मों को बॉलीवुड में हमेशा पसंद किया गया. 1970 के दशक से ही बॉलीवुड में मुंबई और देश के अन्य राज्यों के गैंगस्टर की रियल लाइफ पर बेस्ड फिल्में बनने लगी थीं. 90 और 2000 के दशक में सबसे ज्यादा गैंगस्टर बेस्ड फिल्में बनाई गईं. राइटर सलीम-जावेद की जोड़ी ने गैंगस्टर की लाइफ फैंटेंसी को फिल्मों से जोड़ा और सिनेमा में नया रोमांच पैदा किया. 25 साल के अंतराल में तीन ऐसी फिल्में आईं जिनमें मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन की कहानी थी. इन तीन फिल्मों में से एक ब्लॉकबस्टर, एक हिट और एक हिट रही. एक फिल्म को नेशनल अवॉर्ड भी मिला.
बॉलीवुड की कई फिल्मों में मुंबई अंडरवर्ल्ड की दुनिया को करीब से दिखाया गया. इसकी शुरुआत 1970 के दशक से हुई. स्क्रीनप्ले राइटर सलीम-जावेद ने अपनी कहानियों में मुंबई अंडरवर्ल्ड से जुड़े किरदारों को फिल्म में रखा. इससे कहानियों में नया रोमांच आया. 1973 में आई ‘जंजीर’ फिल्म ने अमिताभ बच्चन को रातोंरात ‘एंग्री यंगमैन’ बनाया. इस फिल्म में प्राण साहब ‘शेर खान’ के किरदार में नजर आए थे. कहा जाता है कि ये किरदार मुंबई के पहले डॉन करीम लाला पर बेस्ड था. 60 के दशक में मुंबई में करीम लाला का बोलबोला था. वो जहां भी कदम रख दे, लोग डर से थर-थर कांपने लगते थे. आगे चलकर ऐसी तीन फिल्में आईं जिनमें रियल लाइफ गैंगस्टर की लाइफ को पर्दे पर दिखाया गया. ये फिल्में थीं : दीवार, अंगार और वास्तव.
बॉलीवुड के लिए 1975 का साल सबसे यादगार माना जाता है. इस साल अलग-अलग जॉनर की फिल्में आईं और बॉक्स ऑफिस पर छा गईं. ‘शोले’ के अलावा इस साल एक और आइकॉनिक फिल्म ‘दीवार’ आई थी. मूवी 24 जनवरी 1975 को रिलीज हुई थी. यह फिल्म हिंदी सिनेमा की 100 मस्ट वॉच लिस्ट शामिल है. इस फिल्म में कई कालजयी डायलॉग भी हैं. खासकर दो डायलॉग ‘मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता’ और ‘मेरे पास मां है’ तो आपने भी सुने होंगे. वैसे तो ‘दीवार’ में अमिताभ बच्चन के अलावा शशि कपूर, नीतू सिंह, परवीन बॉबी, निरूपा रॉय, इफ्तिखार खान, मदन पुरी जैसे सितारे थे लेकिन असल मायने में यह फिल्म अमिताभ की थी. इस फिल्म ने अमिताभ बच्चन को सुपर स्टार बनाया. दीवार फिल्म का डायरेक्शन यश चोपड़ा ने किया था.
‘दीवार’ फिल्म ने इतिहास रचा. इसकी वजह फिल्म की कहानी थी. फिल्म में मुंबई के अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान की लाइफ की झलक दिखाई देती है. फिल्म के सीन और हाजी मस्तान की लाइफ में काफी समानताएं देखने को मिलती हैं. हाजी मस्तान ने भी मझगांव डाकयार्ड में कुली के तौर पर अपनी जिंदगी की शुरुआत की थी. और पठान गैंग के खिलाफ मोर्चा लिया था. ‘दीवार’ फिल्म में विजय वर्मा (अमिताभ बच्चन) भी यही करता है. वो हफ्ता देने से इनकार कर देता है. इससे दर्शक वर्ग की सहानुभूति विजय के साथ हो जाती है. सबसे मजेदार बात यह यह है कि फिल्म के प्रीमियर में इंडस्ट्री से जुड़े ज्यादातर लोगों का मानना था कि मूवी फ्लॉप हो जाएगी लेकिन हुआ इसके ठीक उलट. मूवी ने रिलीज होते ही इतिहास रच दिया. फिल्म ने 4.25 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया. 1975 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में यह चौथे नंबर पर थी.
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1975 में ही गैंगस्टर बेस्ड एक और फिल्म ‘धर्मात्मा’ भी सिनेमाघरों में खूब चली थी. फिर 1992 में एक और क्राइम एक्शन ड्रामा फिल्म ‘अंगार’ रिलीज हुई था. इस मल्टी स्टाटरर फिल्म में जैक श्रॉफ, कादर खान, मजहर खान, नाना पाटेकर लीड रोल में थे. डिंपल कपाड़िया भी अहम किरदार में थीं. ‘अंगार’ फिल्म मुंबई के पहले अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला की लाइफ पर बेस्ड मानी जाती है. संगीतकार आदेश श्रीवास्तव भी एक छोटे से रोल में नजर आए थे. डायरेक्टर शशिलाल के. नायर थे. अंगार फिल्म की स्टोरी-स्क्रीनप्ले सुजीत सेन ने लिखा थी. डायलॉग कादर खान ने लिखे थे. प्रोड्यूस शशिलाल के. नायर और एसएम आरिफ ने किया था. फिल्म में कादर खान ने जहांगीर खान का रोल निभाया जाता है. माना जाता है कि यह किरदार मुंबई के डॉन करीम लाला से इंस्पायर्ड था. करीम लाला को मुंबई का पहला अंडरवर्ल्ड डॉन माना जाता है.
फिल्म की कहानी का दूसरा सिरा मुंबई के स्लम एरिया में रहने वाले बेरोजगार युवक जयकिशन (जैकी श्रॉफ) से जुड़ता है. वो अपनी बस्ती में हफ्ता देने से इनकार करता है. इसी के चलते उसका टकराव जहांगीर खान की गैंग से होता है. माना जाता है कि जैकी श्रॉफ का किरदार मुंबई के गैंगस्टर अमर नाइक से इंस्पार्ड था. अमर नाइक का परिवार कभी सड़क पर सब्जी का ठेला लगाया करता था. अमर नाइक ने हफ्ता देने से इनकार किया और गुंडों की सरेआम पिटाई की थी. उसी दिन से वह मांटुका इलाके का सरगना बन गया. अमर नाइक को लोग ‘मुंबई का रावण’ कहकर बुलाते थे. अरुण गवली गैंग से उसकी अदावत थी. 10 जुलाई 1996 को मुंबई के एगीपाड़ा में आमिर नाइक का एनकाउंटर किया गया था. इस फिल्म में नाना पाटेकर ने विलेन की भूमिका निभाई थी. अंगार फिल्म को 3 फिल्मफेयर अवॉर्ड और एक नेशनल अवॉर्ड भी मिला था. बेस्ट डायलॉग का अवॉर्ड कादर खान को मिला था. 2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब 7.5 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई थी.
गैंगस्टर की रियल लाइफ पर बेस्ड एक और फिल्म आई थी ‘वास्तव – द रियल्टी’ टाइटल से 1999 में आई थी. 7 अक्टूबर 1999 को रिलीज यह एक एक्शन-क्राइम फिल्म थी. स्टोरी-स्क्रीनप्ले और डायरेक्शन महेश मांजरेकर का था. डायलॉग्स इम्तियाज हुसैन ने लिखे थे. बतौर डायरेक्टर यह उनकी पहली फिल्म थी. संजय दत्त, नम्रता शिरोडकर, दीपक तिजोरी, मोहन जोशी, शिवाजी सटाम, रीमा लागू, परेश रावल और संजय नारवेकर जैसे सितारों ने फिल्म में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा था. संजय दत्त ने रघुनाथ उर्फ रघु नामदेव शिवाकर का तो संजय नारवेकर ने डेढ़ फुटिया का किरदार निभाया था. संजय दत्त को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. म्यूजिक जतिन-ललित का था. गीत समीर ने लिखे थे. फिल्म का एक गाना ‘मेरी दुनिया है तुझमें कहीं’ पॉप्युलर हुआ था.
‘वास्तव : द रियलटी’ फिल्म की कहानी मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन की लाइफ पर बेस्ड थी. साधारण से परिवार का लड़का हालात के आगे मजबूर होकर कैसे अपराध की दुनिया में आता है, इस कहानी को फिल्म दिखाती है. छोटा राजन का असली नाम राजेंद्र सदाशिव निखिल्जे था. परिवार के साथ मुंबई के चेंबूर के तिलक नगर में रहता था. राजेंद्र सदाशिव शंकर सिनेमा के बाहर ब्लैक में टिकट बेचा करता था. पुलिस ने पकड़ा तो राजेंद्र सदाशिव ने पुलिसकर्मी से लाठी छीनकर उसे ही पीट दिया. अपने इस कारनामे से वह रातोंरात चर्चा में आ गया. जेल से लौटकर गैंगस्टर राजन नायर उर्फ बड़ा राजन की गैंग ज्वाइन कर ली. 1982 में पठान भाइयों ने बड़ा राजन की हत्या कर दी तो गैंग की कमान राजेंद्र सदाशिव के हाथ में आ गई. यहीं से उसका नाम छोटा राजन पड़ गया. ‘वास्तव – द रियल्टी’ को छोटा राजन के भाई दीपक निखिल्जे ने ही प्रोड्यूस किया था. रियल स्टेट कारोबार से जुड़े दीपक 2004-2009 में लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. 7.5 करोड़ के बजट में बनी इस मूवी ने 20 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक सेमी हिट फिल्म साबित हुई थी. फिल्म को 8 IMDB रेटिंग मिली हुई है.