इंदौर। मध्य भारत के एक अनूठे और प्रेरणादायक कार्यक्रम 'संस्कार शाला' का तीन दिवसीय आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम समाज को संस्कार, आध्यात्म, नैतिक शिक्षा, मानवीय मूल्यों, शिष्टाचार और अनुशासन का पाठ पढ़ाता है। इस पूरे आयोजन को मुख्य बिंदुओं निम्न प्रकार से है।
1. भव्य शुभारंभ और स्वागत समारोह
संस्कार शाला के द्वितीय वर्ष का शुभारंभ भगवान गणपति एवं महर्षि गौतम (गुरु अक्षपाद) के पूजन और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
मुख्य वक्ता का सम्मान: श्री गुर्जर गौड़ नगर सभा (रजि.) इंदौर के अध्यक्ष पंडित वीरेंद्र व्यास ने मंदसौर से पधारे मुख्य विद्वान वक्ता पंडित देवेश्वर जी जोशी का पुष्प, वस्त्र और श्रीफल भेंट कर आदरपूर्वक स्वागत किया।
स्वागत भाषण: अध्यक्ष श्री व्यास ने अपने उद्बोधन में कहा, “यह हमारे लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि पंडित देवेश्वर जी जोशी के सानिध्य में इस संस्कार शाला का आयोजन हो रहा है। जिस प्रकार हम अपने पेट की भूख को शांत करते हैं, उसी प्रकार मन, बुद्धि और मस्तिष्क की क्षुधा (भूख) को शांत करने के लिए ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रमों का होना बेहद आवश्यक है। आप सभी इस पुरुषोत्तम (अधिक) मास में इसका अधिक से अधिक लाभ उठाएं।”
संयोजक का आभार: संस्कार शाला के संयोजक डॉ. पंडित सोमेश्वर जोशी ने कार्यक्रम में पधारे सभी पदाधिकारियों और सम्मानीय सदस्यों की सहभागिता की सराहना करते हुए उनका अभिनंदन किया।
2. ब्राह्मणत्व और संस्कारों का महत्व
संयोजक डॉ. सोमेश्वर जोशी ने संस्कार शाला के मुख्य उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि ब्राह्मण की वास्तविक शक्ति उसका 'ब्राह्मणत्व' है।
संस्कारों के प्रकार: उन्होंने बताया कि संस्कार सजीव और निर्जीव दोनों के होते हैं। शास्त्रों में 6 से लेकर 48 प्रकार के संस्कारों का वर्णन है, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण 'यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार' है, जिसके कारण हम 'ब्राह्मण' और 'द्विज' कहलाते हैं।
उदाहरण द्वारा सीख: उन्होंने एक सुंदर उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस तरह हम बिना धुले अपवित्र बर्तन को स्वीकार नहीं करते (यह बर्तन का संस्कार है), ठीक उसी तरह यदि कोई ब्राह्मण अपने नित्य कर्म और संध्या-वंदन नहीं करता, तो समाज उसे कैसे स्वीकार कर सकता है? इस पुरुषोत्तम मास में संध्या, पूजन, अभिषेक और शालग्राम जी पर तुलसी दल द्वारा किया गया 51,000 अर्चन अनंत पुण्य फल देने वाला होगा।
3. मुख्य वक्ता पंडित देवेश्वर जोशी का संदेश
श्लोकों का वाचन: विद्वान वक्ता पंडित देवेश्वर जोशी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को महत्वपूर्ण पुण्य श्लोकों का संग्रह, गौतम अष्टक और 'संध्या बलिवैश्वदेव' पुस्तक का वितरण किया। उन्होंने सभी से इन श्लोकों का वाचन करवाकर उनके गूढ़ अर्थों को समझाया।
ब्राह्मणों का गौरवशाली इतिहास: उन्होंने कहा कि सृष्टि के प्रारंभ से ही ब्राह्मण समाज का मार्गदर्शन करते रहे हैं और ईश्वर के प्रिय रहे हैं। बड़े-बड़े चक्रवर्ती सम्राट भी ब्राह्मणों से मार्गदर्शन लेते थे और राजाओं के मन में उनके प्रति अगाध श्रद्धा और पूर्ण विश्वास था। जब तक यह व्यवस्था रही, राजकीय और सामाजिक कार्य सुचारू रूप से चलते रहे।
वर्तमान स्थिति और आत्मचिंतन:
वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा, “आज ब्राह्मणों की जो स्थिति है, उसके जिम्मेदार वे स्वयं हैं। जब हम अपनी जड़ों और नित्य कर्मों से अलग हुए, तो हमारा तेज भी कम हुआ और समाज में हमारी विश्वसनीयता भी घटी। यदि ब्राह्मण समाज अपना खोया हुआ गौरव पुनः प्राप्त करना चाहता है, तो उसे शास्त्रों के आदेशों और मर्यादाओं के अनुसार ही अपना आचरण व दिनचर्या रखनी होगी।”
4. मुख्य अतिथि और विशिष्ट जनों की उपस्थिति
इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में विद्या धाम मंदिर के संचालक श्री दिनेश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उनके साथ ही श्री गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज की विभिन्न संस्थाओं के अध्यक्ष और गणमान्य जन मंच पर आसीन थे, जिनमें प्रमुख हैं:
- श्री वीरेंद्र व्यास (अध्यक्ष, नगर सभा)
- श्री के. सी. शर्मा (पूर्व अध्यक्ष, नगर सभा)
- श्री अरविंद तिवारी (शैक्षणिक न्यास)
- श्री विवेक व्यास (सहकारी साख संस्था)
- श्री सतीश व्यास (गौतम सोशल ग्रुप)
- श्रीमती रंगीमा जोशी (सांस्कृतिक संगठन)
- श्रीमती माया शर्मा (माया श्याम ग्रुप)
- श्री जयंत उपाध्याय (कार्यक्रम व्यवस्थापक)
5. सम्मान समारोह और समापन
स्वागत: मंचासीन सभी महानुभावों ने मिलकर मुख्य वक्ता पंडित देवेश्वर जोशी जी को पुष्पमाला, शाल, श्रीफल, दुपट्टा और महर्षि गौतम की अष्टधातु की प्रतिमा भेंट कर उनका भावभीना सम्मान और अभिनंदन किया। उपस्थित सभी अतिथियों ने संस्कार शाला की भूरि-भूरि (बहुत अधिक) प्रशंसा की और ब्राह्मणत्व की रक्षा के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर आयोजित करने पर जोर दिया।
प्रमाण पत्र वितरण: इस तीन दिवसीय संस्कार शाला में पूर्ण निष्ठा से भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
भोजन प्रसाद: कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित समाज जनों के लिए स्वादिष्ट भोजन (प्रसादी) की व्यवस्था की गई।
संचालन एवं आभार:
पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन नगर सभा के महामंत्री पंडित कमलेश तिवारी ने किया। अंत में पंडित जयंत उपाध्याय ने सभी प्रतिभागियों, अतिथियों और समाज जनों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।