Purushottam Maas 2026: अधिकमास (जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है) को सनातन धर्म में आध्यात्मिक शुद्धि और पुण्य कमाने का सबसे सर्वोत्तम समय माना गया है। भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम 'पुरुषोत्तम' दिया है, इसलिए मान्यता है कि इस मास में किए गए दान और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अनंत गुणा या कई गुना अधिक प्राप्त होता है।ALSO READ: पुरुषोत्तम मास 2026: इस पवित्र महीने में करें ये 5 काम, धन-दौलत और सुख-समृद्धि की होगी वर्षा
हिंदू धर्मग्रंथों में इस माह को जप, तप, व्रत, दान और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत शुभ बताया गया है। इस पवित्र महीने में कुछ विशेष वस्तुओं के दान को 'महादान' की श्रेणी में रखा गया है।
1. 33 मालपुए का दान (सबसे प्रमुख दान)
2. दीपदान (घृत दीप दान)
3. धार्मिक पुस्तकों का दान (ग्रंथ दान)
4. सुहाग सामग्री और वस्त्र दान
5. अन्न और रसीले फलों का दान
6. तिथि के अनुसार विशेष दान सूची
7. अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) महादान (FAQ)
आइए जानते हैं कि वे महादान कौन से हैं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनका क्या फल मिलता है:
अधिकमास के 5 महादान और उनके फल
1. 33 मालपुए का दान (सबसे प्रमुख दान)
अधिकमास में कांसे के बर्तन में 33 मालपुए रखकर दान करने का सबसे बड़ा महत्व है।
33 की संख्या ही क्यों? ज्योतिषीय गणना के अनुसार अधिकमास लगभग 32-33 महीने के बाद आता है, इसलिए 32 महीनों के प्रतीक स्वरूप और एक अतिरिक्त विषम संख्या जोड़कर कुल 33 मालपुए दान किए जाते हैं। धार्मिक रूप से इसे 33 कोटि यानी प्रकार देवी-देवताओं के सम्मान से भी जोड़ा जाता है।
मिलने वाला फल: शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा से यह दान करता है, उसके जीवन के सभी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं। इसे 'दरिद्रता नाशक दान' भी कहा जाता है।
2. दीपदान (घृत दीप दान)
इस पूरे महीने में प्रतिदिन शाम के समय पीपल के पेड़ के पास, मंदिर में, तुलसी जी के सम्मुख या बहती नदी में घी का दीपक जलाना या कांसे के पात्र में घी भरकर दीपक सहित दान करना महापुण्यदायी माना जाता है।
फल: दीपदान करने से वंश की वृद्धि होती है, अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और घर का अंधकार अर्थात् कष्ट, कलह और नकारात्मकता दूर होकर सुख-समृद्धि का आगमन होता है।ALSO READ: पुरुषोत्तम मास 2026: कौन से मंत्र, पाठ और चालीसा दिलाते हैं अपार पुण्य और सुख-समृद्धि?
3. धार्मिक पुस्तकों का दान (ग्रंथ दान)
अधिकमास विशुद्ध रूप से भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की भक्ति का महीना है। इस दौरान श्रीमद्भागवत गीता, विष्णु सहस्रनाम या रामायण जैसी पवित्र पुस्तकों का दान किसी योग्य ब्राह्मण या जिज्ञासु व्यक्ति को करना चाहिए।
फल: शास्त्रों में ज्ञान और धर्मग्रंथ के दान को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इससे व्यक्ति को वैकुंठ धाम/ मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितर प्रसन्न होते हैं।
4. सुहाग सामग्री और वस्त्र दान
सुहागिन महिलाओं को इस महीने में लाल वस्त्र, हरी चूड़ियां, सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी जैसी सुहाग की 16 सामग्रियां दान करनी चाहिए। साथ ही जरूरतमंदों को मौसम के अनुकूल- जैसे सूती या ऊनी साफ वस्त्र देने चाहिए।
मिलने वाला फल: सुहाग सामग्री के दान से महिलाओं को अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान सुख का वरदान मिलता है। वस्त्र दान से व्यक्ति का मान-सम्मान समाज में बढ़ता है।
5. अन्न और रसीले फलों का दान
किसी भूखे व्यक्ति या ब्राह्मण को अनाज- जैसे गेहूं, चावल, दाल और इस मौसम के रसीले फल- आम, खरबूजा या जल से भरा कलश दान करना।
फल: अन्न और जल दान को जीवन दान के समान माना गया है। इससे अन्नपूर्णा माता प्रसन्न रहती हैं और घर के भंडार कभी खाली नहीं होते। कुंडली के कई ग्रह दोष भी इस दान से शांत हो जाते हैं।ALSO READ: अधिकमास: पुरुषोत्तम मास की आरती
6. तिथि के अनुसार विशेष दान सूची
यदि आप पूरे महीने महादान नहीं कर पा रहे हैं, तो अधिकमास की अलग-अलग तिथियों पर इन चीजों का लघु दान भी कर सकते हैं:
तिथि: दान की जाने वाली वस्तु
प्रतिपदा (पहली तिथि): चांदी के पात्र या दीये में शुद्ध घी का दान
द्वितीया: कांसे के पात्र में सोने या मिश्री का दान
तृतीया: उत्तम चने की दाल या दही का दान
चतुर्थी व पंचमी: रेशमी या सूती वस्त्रों का दान
अष्टमी: तिल और गुड़ का दान (राहु-केतु दोष शांति के लिए)
एकादशी व द्वादशी: गाय का शुद्ध दूध और गेहूं का दान
अमावस्या/पूर्णिमा: 33 मालपुए, खीर या कद्दू (पेठा) का दान
दान का मूल नियम: पुरुषोत्तम मास में कोई भी दान करते समय मन में अहंकार नहीं होना चाहिए। गुप्त रूप से और बिना किसी दिखावे के, निस्वार्थ भाव से किया गया छोटा सा दान भी भगवान विष्णु तुरंत स्वीकार कर लेते हैं।
पुरुषोत्तम मास में दान का महत्व केवल वस्तु देने तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, करुणा और परोपकार की भावना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान भगवान विष्णु की कृपा दिलाने वाला माना गया है। इस पवित्र माह में अन्नदान, जलदान, गौसेवा, वस्त्रदान और धर्मग्रंथ दान जैसे कार्य विशेष पुण्य प्रदान करते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
7. अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) महादान (FAQ)
1. अधिकमास या पुरुषोत्तम मास क्या है?
अधिकमास हिंदू पंचांग का एक विशेष माह है, जो लगभग हर 32 महीने 16 दिन 8 घंटे बाद आता है। इसे भगवान विष्णु ने अपना नाम “पुरुषोत्तम मास” प्रदान किया था, इसलिए यह अत्यंत पवित्र माना जाता है।
2. पुरुषोत्तम मास में दान का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में किया गया दान, जप, तप और पूजा कई गुना अधिक पुण्यफल प्रदान करती है। दान से पापों का क्षय और पुण्य की वृद्धि होती है।
3. पुरुषोत्तम मास में सबसे श्रेष्ठ दान कौन-सा माना गया है?
अन्नदान को सबसे श्रेष्ठ दान माना गया है, क्योंकि इससे भूखे व्यक्ति की तृप्ति होती है और इसे महापुण्यदायक बताया गया है।
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