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WHO Shocking Report: हम हर दिन भोजन करते हैं और यही सोचते हैं कि जो खा रही हैं वह एकदम सेफ है लेकिन क्या वह वाकई सुरक्षित है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की नई रिपोर्ट इसे लेकर हैरतअंगेज खुलासा हुआ है, रिपोर्ट के मुताबिक अनसेफ या दूषित भोजन के कारण हर साल दुनिया भर में 15 लाख लोगों की मौत हो जाती है. इतना ही नहीं इस कारण 86 करोड़ से ज्यादा लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ जाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक फूड पॉइजनिंग के अलावा भोजन में मौजूद आर्सेनिक और लेड जैसे घातक केमिकल 73% मौतों के लिए जिम्मेदार हैं.
दूषित खाद्य पदार्थों से 300 अरब डॉलर का घाटा.
WHO Shocking Report : फूड प्वाइजनिंग के मामले आए दिन सुनते ही रहते हैं लेकिन एक और चीज है जिसके बारे में आप शायद ही सुनते हैं. दरअसल, ये चीजें छुपी हुई रहती है. अब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अनसेफ, दूषित या असुरक्षित खाद्य पदार्थों के कारण हर साल 15 लाख लोगों की मौत हो जाती है और 86 करोड़ से ज्यादा लोग बीमार पड़ जाते हैं. यह रिपोर्ट बेहद खौफनाक है क्योंकि पूरे देश में असुरक्षित फूड के कई मामले आते रहते हैं. हर जगह मिलावटी खाद्य पदार्थ और इसमें मिले रसायन गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करता है. रिपोर्ट के मुताबिक असुरक्षित या दूषित फूड के कारण दुनिया भर को 310 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ता है. अगर इसमें कॉस्ट ऑफ लिविंग को भी जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा दोगुना हो जाता है.
क्या है रिपोर्ट में
रिपोर्ट के मुताबिक फूड खराबी की जो समस्या है इनमें दूषित पानी, साफ-सफाई में गड़बड़ी के कारण फूड का दूषित होना और बने-बनाए फूड में संक्रमण प्रमुख चुनौतियां हैं. हालांकि सन 2000 के बाद से संक्रमित फूड के मामलों में बहुत कमी आई है लेकिन आज भी यह पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है और जो पिछड़ा क्षेत्र है, उनमें यह समस्या और भी ज्यादा है. रिपोर्ट के अनुसार 2021 में भोजन के जरिए फैलने वाले बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी संक्रमणों के कारण लगभग 86 करोड़ बीमारियां हुईं. वहीं, रासायनिक प्रदूषण से होने वाली बीमारियों की संख्या कम होने के बावजूद मौतों का अनुपात काफी अधिक रहा. इसका मतलब यह हुआ है कि अगर फूड में केमिकल मिला हुआ है तो उससे बीमारी के बाद मौत के मामले ज्यादा आते हैं.
केमिकल वाले फूड से मौत का खतरा ज्यादा
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में अनसेफ फूड के कारण जितनी मौतें हुईं उनमें 73 प्रतिशत मौतों के लिए रासायनिक फूड ही जिम्मेदार है. इन मौतों में सबसे बड़ा योगदान अकार्बनिक आर्सेनिक का है. आर्सेनिक सबसे ज्यादा पानी में मिला रहता है. इसके साथ ही यह फूड में भी मिला रहता है. आर्सेनिक के कारण 43 प्रतिशत मौतें हुई है. इसके बाद लेड यानी सीसा विषाक्तता है. इससे 31 प्रतिशत लोगों की मौत हुई. इसका सबसे बड़ा शिकार बच्चे होते हैं. इन दोनों केमिकल से हार्ट डिजीज और कैंसर तक का जोखिम रहता है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक भोजन में मौजूद मिथाइलमरकरी और सीसा जैसे रासायनिक तत्व बच्चों के विकसित हो रहे मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे जीवनभर रहने वाली न्यूरोलॉजिकल और विकास संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में असुरक्षित भोजन से बीमार पड़ने का खतरा वयस्कों और बड़े बच्चों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है. दुनिया की कुल आबादी में छोटे बच्चों की हिस्सेदारी केवल 9 प्रतिशत है, लेकिन दूषित फूड से होने वाली बीमारियों के लगभग एक-तिहाई मामले इसी आयु वर्ग में दर्ज किए जाते हैं. इनमें डायरिया जैसी बीमारियां प्रमुख हैं, जो छोटे बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं. डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने बताया कि खाद्य सुरक्षा हर भोजन, हर परिवार और हर दिन से जुड़ा हुआ विषय है. असुरक्षित भोजन हमेशा से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती रहा है. पहली बार देशों के पास इसे लेकर एक समग्र आंकड़े हैं. इस आधार पर खाद्य सुरक्षा को लेकर नई नीतियां बना सकती हैं.
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18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें