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छतरपुर जिले के लवकुश नगर के रहने वाले रामनरेश जिनकी उम्र तो 74 साल हो गई है लेकिन आज भी युवाओं की तरह एकदम फिट हैं. रामनरेश जिंदगी में कभी बीमार भी नहीं पड़े. आज भी रामनरेश दिनभर में 20 से 25 रोटी खा लेते हैं. साथ ही 2 लीटर दूध और पावभर घी आसानी से पचा लेते हैं
छतरपुर जिले के लवकुश नगर के रहने वाले रामनरेश जिनकी उम्र तो 74 साल हो गई है लेकिन आज भी युवाओं की तरह एकदम फिट हैं. रामनरेश जिंदगी में कभी बीमार भी नहीं पड़े. आज भी रामनरेश दिनभर में 20 से 25 रोटी खा लेते हैं. साथ ही 2 लीटर दूध और पावभर घी आसानी से पचा लेते हैं. रामनरेश बताते हैं कि उनकी लाइफस्टाइल पूरी देसी है. वह शहर में रहकर आज भी पंखा-कूलर की कूलर की हवा में नहीं सोते हैं. रामनरेश आज भी बिल्कुल स्वस्थ और फिट हैं.
रामनरेश पटवा लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि मैं पहलवान रहा हूं. आज भले ही 73 साल का हो गया हूं लेकिन शरीर में दम इतनी है कि आज के युवा भी मेरे सामने पानी मांगते हैं. बुढ़ापे में लोगों का वजन घटने लगता है लेकिन मेरा जवानों की तरह 80 किलो से भी ज्यादा वजन हो जाता है. क्योंकि मेरी खुराक आज भी युवाओं की तरह है. मैंने पहलवानी भी लड़ी है. जितने पहलवानों से लड़ा हमेशा जीता हूं. आज भी रियाज करता हूं.
दिनभर में 20 से 25 रोटी खा लेते
रामनरेश बताते हैं कि 74 साल की उम्र में आज भी मैं एक बार में 12 रोटी और 1 किलो दूध पी जाता हूं. साथ ही 100 से 200 ग्राम घी भी खा जाता हूं. पूरे दिन की बात करें तो 20 से 25 रोटी आसानी से खा लेता हूं. साथ ही काजू बादाम जैसे मेवा भी खाता हूं. इतना सारा खाना इस उम्र में मेरे लिए पचाना आसान है. क्योंकि मैं पहलवानी की रियाज भी करता हूं. हालांकि, अभी भी मेरी एक अधूरी इच्छा है कि मैं 1 लीटर दूध को 50 ग्राम घी के साथ खाना चाहता हूं.
कभी पीते थे 7 लीटर दूध
रामनरेश बताते हैं कि जब मैं पहलवानी करता था तो मैं 7 लीटर दूध पीता था. साथ ही काजू-बादाम, किशमिश सब खाता था. आज भी ये सभी चीजें खाता हूं लेकिन मात्रा कम हो गई है. जीवन में कभी भी मांस और शराब का सेवन नहीं किया है. आज भी दूध-घी, मेवा का सेवन करता हूं.
नहीं पड़े कभी बीमार
रामनरेश बताते हैं कि 74 साल का चल रहा हूं. लेकिन आज भी शरीर में किसी भी तरह की बाधा नहीं लगी है. मुझे किसी भी तरह की बीमारी नहीं हुई है. साल में 1 बार सर्दी-जुकाम हो गया वो बात अलग है लेकिन वह भी अपने आप घर पर ही बिना दवाई लिए ठीक हो जाता है.
भैंस की सेवा करते हैं
रामनरेश बताते हैं कि दूध-घी खाता हूं इसलिए भैंस घर में पालकर रखी हैं. सुबह 5 बजे से जग जाता हूं. उठकर सबसे पहले भैंसों की सानी-भूसा करता हूं. दिन में किराना दुकान चलाता हूं फिर शाम को भैंसों की सानी भूसा करके आराम करता हूं.
खुली हवा में नींद लेना पसंद
रामनरेश बताते हैं कि वह जीवन में कभी पंखा-कूलर में नहीं सोए हैं. आज भी वह खुली हवा में ही सोते हैं. हालांकि, अगर कहीं फंस गए तो मजबूरन वहां कूलर पंखे में रहना पड़ता है. लेकिन कूलर पंखे में रहने के बाद उन्हें शरीर दर्द होने लगता है. वह खुली हवा ही पसंद करते हैं. इसलिए गर्मी में घर के द्वार में चारपाई में खुले में सोते हैं.