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बच्चों और अभिभावकों के बीच लोकप्रिय सेसमी स्ट्रीट और सेसम वर्कशॉप इंडिया ने ‘हेल्थी हैबिट्स’ अभियान के तहत 200 से अधिक बच्चों पर अध्ययन किया है. संस्था के यूट्यूब चैनलों के लाखों-करोड़ों सब्सक्राइबर हैं. इसके कार्यक्रम भारत समेत 150 देशों में देखे जाते हैं. इस अध्ययन का उद्देश्य बच्चों की खानपान और जीवनशैली से जुड़ी आदतों को समझना था.
नई दिल्ली: बच्चों में जंक फूड और पैकेटबंद स्नैक्स खाने की आदत लगातार बढ़ती जा रही है. जागरूकता अभियानों के बावजूद बड़ी संख्या में माता-पिता अपने बच्चों को अस्वास्थ्यकर खानपान से दूर नहीं रख पा रहे हैं. स्थिति यह है कि कई बच्चे नियमित भोजन की जगह स्नैक्स खाकर ही पेट भर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती है. इसके साथ ही बच्चों में मोटापे की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है. खेलकूद की गतिविधियां कम हो रही हैं और स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ता जा रहा है, जो भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है.
यह जानकारी सेसम वर्कशॉप इंडिया की प्रबंध निदेशक सोनाली खान ने दी. उन्होंने बताया कि बच्चों और अभिभावकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए उनकी संस्था लंबे समय से काम कर रही है. सेसमी स्ट्रीट और सेसम वर्कशॉप इंडिया के कार्यक्रम भारत सहित दुनिया के 150 से अधिक देशों में देखे जाते हैं. संस्था द्वारा चलाए गए “हेल्थी हैबिट्स” अभियान के तहत किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया कि बड़ी संख्या में बच्चे पौष्टिक भोजन के बजाय स्नैक्स पर निर्भर होते जा रहे हैं.
क्या है हेल्थी हैबिट्स अभियान?
सोनाली खान ने बताया कि उनकी संस्था जन्म से लेकर 8 वर्ष तक के बच्चों के विकास और शिक्षा पर काम करती है. स्टोरी टेलिंग, जागरूकता कार्यक्रमों और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों और अभिभावकों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित किया जाता है. इसी उद्देश्य से ‘हेल्थी हैबिट्स’ अभियान के तहत वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 200 से अधिक बच्चों पर एक अध्ययन किया गया.
पोषण की दृष्टि से पर्याप्त नहीं
अध्ययन के परिणामों में सामने आया कि कई माता-पिता बच्चों को ऐसे स्नैक्स दे रहे हैं जो स्वाद तो बढ़ाते हैं, लेकिन पोषण की दृष्टि से पर्याप्त नहीं होते. लगातार स्नैक्स खाने के कारण बच्चे सामान्य भोजन, हरी सब्जियां और पौष्टिक आहार लेने से बचने लगे हैं. सोनाली खान के अनुसार, जब बच्चों को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिलेंगे तो उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ना स्वाभाविक है. उन्होंने बताया कि इस अभियान को उत्तर प्रदेश सरकार का भी सहयोग प्राप्त हुआ.
मोटापा फिटनेस की पहचान नहीं
सोनाली खान ने कहा कि किसी बच्चे का अधिक वजन होना उसकी अच्छी सेहत या फिटनेस का प्रमाण नहीं माना जा सकता. इसी तरह अत्यधिक दुबलापन भी स्वस्थ होने का संकेत नहीं है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चा कितना सक्रिय है और उसकी जीवनशैली कितनी संतुलित है. उन्होंने बताया कि जन्म से 8 वर्ष की उम्र तक का समय बच्चों के मस्तिष्क और शरीर के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में माता-पिता को बच्चों के खानपान, दिनचर्या और गतिविधियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए. बच्चों को पर्याप्त समय देना, पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और उन्हें शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है.
खेलकूद और अच्छी आदतों पर दें जोर
सोनाली खान ने बताया कि उनकी संस्था योग और अन्य गतिविधियों के माध्यम से भी बच्चों में स्वस्थ आदतें विकसित करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि बच्चों का नियमित रूप से खेलना-कूदना बहुत जरूरी है. स्वस्थ आदतें विकसित करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी माता-पिता की होती है. उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को भोजन से पहले हाथ धोने, साफ-सफाई बनाए रखने, स्वच्छ कपड़े पहनने और संतुलित आहार लेने की आदत बचपन से ही सिखाएं. उनका मानना है कि बचपन में विकसित की गई अच्छी आदतें जीवनभर साथ रहती हैं. इसलिए बच्चों को जंक फूड और अत्यधिक स्नैक्स देने के बजाय पौष्टिक और संतुलित भोजन देना अधिक लाभकारी है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें