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ब्रेन ट्यूमर के लक्षण केवल सिरदर्द या मिर्गी तक सीमित नहीं होते, बल्कि आंखों में होने वाले कुछ बदलाव भी इसका संकेत हो सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, दो-दो दिखाई देना, नजर कमजोर होना या देखने के दायरे में बदलाव जैसे लक्षण कुछ प्रकार के ब्रेन ट्यूमर से जुड़े हो सकते हैं. समय रहते जांच और उपचार से बीमारी का प्रभावी प्रबंधन संभव है. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए.
फरीदाबाद: ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है. आमतौर पर लोग इसे सिरदर्द, चक्कर आना या याददाश्त कमजोर होने जैसे लक्षणों से जोड़ते हैं… लेकिन कई बार आंखों में होने वाले बदलाव भी इस गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं. समय रहते इन संकेतों को पहचानना और जांच करवाना बेहद जरूरी है.
क्यों बढ़ रहे हैं ब्रेन ट्यूमर के केस
लोकल18 से बातचीत में अमृता हॉस्पिटल फरीदाबाद के सीनियर कंसल्टेंट न्यूरो सर्जन डॉ. प्रदीप शर्मा बताते हैं आज के समय में ब्रेन ट्यूमर के काफी मामले देखने को मिल रहे हैं. यह बीमारी सिर्फ बुजुर्गों में ही नहीं बल्कि युवा आबादी में भी दिखाई दे रही है. ब्रेन ट्यूमर आमतौर पर सिरदर्द और मिर्गी के साथ प्रेजेंट करता है… लेकिन कुछ मरीजों में आंखों से जुड़े बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं.
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण
डॉ. प्रदीप शर्मा बताते हैं यदि किसी व्यक्ति को एक तरफ देखने पर दो-दो दिखाई देने लगे या कुछ समय से उसकी देखने की क्षमता कम होती जा रही हो तो यह कुछ विशेष प्रकार के ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है. पिट्यूटरी ट्यूमर जो दिमाग की हार्मोन ग्रंथि में विकसित होता है आंखों की नसों के पास होने के कारण ऐसे बदलाव पैदा कर सकता है.
डॉ. प्रदीप शर्मा बताते हैं कुछ मरीजों में आंखों के आसपास कालापन या त्वचा का रंग बदलने जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं. इसके अलावा ब्रेन ट्यूमर के कारण सिरदर्द, मिर्गी और व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं. यदि ट्यूमर देखने वाली नसों के पास हो तो मरीज को आंशिक रूप से दिखाई देना कम हो सकता है जिससे चलते समय एक तरफ टकराने या वाहन चलाते समय एक दिशा से आने वाले वाहनों को नजरअंदाज करने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
ब्रेन ट्यूमर का इलाज
डॉ. प्रदीप शर्मा बताते हैं उम्र बढ़ने के साथ ब्रेन ट्यूमर की संभावना भी बढ़ जाती है. ब्रेन ट्यूमर कोई एक बीमारी नहीं है बल्कि इसके कई प्रकार होते हैं और हर ट्यूमर का व्यवहार अलग-अलग होता है. इलाज का पहला कदम ट्यूमर को सुरक्षित तरीके से निकालना होता है ताकि उसकी जांच कर यह समझा जा सके कि आगे रेडिएशन या कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ेगी या नहीं और भविष्य में इसके दोबारा होने की कितनी संभावना है.
क्या मोबाइल-लैपटॉप के इस्तेमाल से बढ़ता है ब्रेन ट्यूमर
डॉ. प्रदीप शर्मा बताते हैं अभी तक किसी वैज्ञानिक अध्ययन में यह साबित नहीं हुआ है कि मोबाइल या लैपटॉप के इस्तेमाल से ब्रेन ट्यूमर होता है. हमारी ओपीडी में हर दिन दो से तीन मरीज ऐसे आते हैं जिनमें ब्रेन ट्यूमर से जुड़े संकेत दिखाई देते हैं. यह बीमारी अधिकतर 50 से 60 वर्ष की उम्र में देखने को मिलती है, लेकिन आजकल 20 से 25 साल के युवाओं और छोटे बच्चों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं.
डॉ. प्रदीप शर्मा बताते हैं ब्रेन ट्यूमर होने पर घबराने की जरूरत नहीं है. सबसे जरूरी है समय पर इलाज की दिशा में कदम बढ़ाना. सही उपचार और समय पर देखभाल से मरीज बेहतर जीवन जी सकता है. स्वस्थ खानपान सिर्फ ब्रेन ट्यूमर ही नहीं… बल्कि शरीर के सभी अंगों के लिए फायदेमंद होता है और अच्छी जीवनशैली बनाए रखने में मदद करता है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें