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Ballia News: मौलश्री एक अद्भुत पौधा है, जिसे बकुल के नाम से भी जानते हैं. आयुर्वेद में यह एक ऐसा वृक्ष है, जिसका जड़, तना, छाल, पत्तियां, फूल और फल सभी हिस्से उपयोगी बताए गए हैं. कई रोगों में रामबाण यह पौधा पर्यावरण को भी एकदम शुद्ध बना देता है. आइए इसके आयुर्वेदिक फायदों के बारे में जानते हैं.
आयुर्वेद में बहुगुणी औषधीय वृक्ष मौलश्री को कहा जाता है. इसके लगभग सभी हिस्सों का उपयोग विभिन्न पारंपरिक उपचारों में किया जाता रहा है. मौल श्री के छाल, जड़, पत्तियां और फूल बेहद लाभकारी और गुणकारी होते हैं. ग्रामीण अंचल में लोग लंबे समय से इसे घरेलू औषधि के रूप में प्रयोग करते आ रहे हैं. यह पौधा आज भी लोगों के लिए लाभकारी बना हुआ है.
बलिया की फेमस सात साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रियंका सिंह के अनुसार, आयुर्वेद पद्धति में मौलश्री की छाल को विशेष महत्त्व दिया गया है. इसकी छाल को सुखाकर तैयार किया गया चूर्ण मंजन के रूप में उपयोग किया जाता है. इससे दांतों और मसूड़ों की देखभाल में मदद मिल सकती है. हालांकि किसी भी प्रकार का नियमित उपयोग करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूरी है.
मौलश्री के फूलों का उल्लेख भी आयुर्वेदिक में मिलता है. पारंपरिक मान्यताओं में फूलों के स्वरस का उपयोग सिरदर्द और माइग्रेन जैसी समस्याओं में किया जाता रहा है. इसके सुगंधित फूल वातावरण को भी मनभावन बनाते हैं. इसी के चलते यह पौधा केवल औषधीय दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सौंदर्य और प्राकृतिक शांति प्रदान करने वाले वृक्ष में नंबर 1 हैं.
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आयुर्वेद परंपराओं में मौलश्री के सूखे फूलों का भी उपयोग विशेष तरीके से किया जाता रहा है. लेकिन इसके फूलों को रातभर पानी में भिगोकर रखने और सुबह छानकर सीमित मात्रा में सेवन करने की सलाह दी जाती है. एक्सपर्ट के मुताबिक, इससे शरीर को ताजगी मिलती है और हृदय स्वास्थ्य को मदद मिलती है. हालांकि, इसके प्रभाव सबके लिए अलग-अलग हो सकते हैं.
मौलश्री के छाल से पेस्ट तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग भी पारंपरिक चिकित्सा में उल्लेखित है. जानकारों के मुताबिक, इसे त्वचा पर लगाने से कीड़े-मकोड़ों के काटने से होने वाली समस्याओं में राहत मिलती है. पुराने घावों के देखभाल में भी इसका प्रयोग बताया गया है. लेकिन किसी भी त्वचा संबंधी समस्या में बगैर चिकित्सकीय सलाह लिए इसका प्रयोग न करें.
पर्यावरणविद् डॉ. गणेश कुमार पाठक के अनुसार, मौलश्री केवल एक औषधीय महत्व रखने वाला वृक्ष ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी उपयोगी माना जाता है. इसकी घनी हरियाली और सुगंधित फूल आसपास के वातावरण को आकर्षक बनाते हैं. लोग इसे घर, बगीचे और मंदिरों के आसपास लगाना पसंद करते हैं. स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में भी ऐसे वृक्ष महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसीलिए इसको बड़ी-बड़ी कंपनियां लगाती हैं.
इस पौधे के बेहतर विकास के लिए साफ-सफाई और उचित देखभाल जरूरी है. पौधे को ऐसी जगह लगाना चाहिए, जहां पर्याप्त धूप और अनुकूल मिट्टी हो. शुरुआती दिनों में नियमित सिंचाई और संरक्षण इसकी वृद्धि में तेजी लाती है. सही देखभाल से यह वृक्ष लंबे समय तक जीवित रह सकता है और सालों तक अपनी छाया, सुंदरता और उपयोगिता से लोगों को लाभान्वित करेगा.
हालांकि, मौलश्री बहुत गुणकारी पौधा है, लेकिन इसका उपयोग सोच-समझकर ही करना उचित होता है. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी औषधीय पौधे का सेवन बिना एक्सपर्ट की राय लिए नहीं करना चाहिए. गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और अन्य मरीजों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए. सही मात्रा, सही विधि और चिकित्सकीय सलाह के साथ ही इसका उपयोग फायदेमंद हो सकता है.