चेहरे पर पिंपल्स कई वजहों के कारण होते हैं. खानपान या स्किन में इंफेक्शन से होने वाले पिंपल्स आमतौर पर बहुत ही आसानी से चले जाते हैं. इनका कोई खास पैटर्न नहीं होता है. लेकिन यदि कोई पिंपल हर बार एक ही जगह पर होता है. महंगी क्रीम, लोशन वगैरह इस्तेमाल करने के बावजूद ठीक नहीं होता है, तो इसे मामूली नहीं समझना चाहिए.
एलांटिस हेल्थ्केयर नई दिल्ली में डर्मेटोलॉजिस्ट और एस्थेटिक फिजिशियन, MBBS, MD, डॉ.चांदनी जैन गुप्ता बताती हैं कि मुंहासों हार्मोन से भी संबंध होता है और हार्मोन में बदलाव के कारण ये और बढ़ जाते हैं. इसे आमतौर पर हार्मोनल मुंहासे कहा जाता है।.इस तरह के मुंहासों के इलाज का पहला कदम यह पता लगाना है कि इनका कारण क्या है.
हार्मोनल मुंहासे क्यों होते हैं?
हार्मोनल मुंहासे होने का मुख्य कारण एंड्रोजन हार्मोन के बढ़ने से सिबेसियस ग्लैंड्स द्वारा सीबम का ज्यादा बनना है. जब आपकी त्वचा पर बहुत ज्यादा तेल जमा हो जाता है, तो यह गंदगी, मृत त्वचा और बैक्टीरिया के साथ मिलकर पोर्स को बंद कर देता है, जिससे सूजन या जलन होती है. कई अलग-अलग घटनाएं आपके हार्मोन के स्तर को प्रभावित कर सकती हैं- जैसे प्यूबर्टी , मेंस्ट्रुअल साइकिल , गर्भावस्था, मेनोपॉज और पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम. स्ट्रेस भी हार्मोनल मुंहासे होने में भूमिका निभाता है क्योंकि स्ट्रेस में होने पर कोर्टिसोल का उत्पादन बढ़ जाता है, जिससे तेल का उत्पादन भी बढ़ता है औ मुंहासे ज्यादा होने लगते हैं.
मुंहासे हटाने के लिए क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट बताती हैं कि अक्सर लोग सोचते हैं कि तेज असर वाले स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते रहने और बार-बार अपना स्किनकेयर रूटीन बदलने से उनकी त्वचा की समस्याएं ठीक हो जाएंगी. लेकिन जब तक हार्मोन असंतुलन की असली वजह का इलाज नहीं किया जाता, तब तक महंगी क्रीम से भी मनचाहा नतीजा नहीं मिल सकता है.
आमतौर पर, हार्मोनल मुंहासों के इलाज के लिए जीवनशैली में बदलाव और दवाइयों, दोनों की जरूरत होती है. डर्मेटोलॉजिस्ट सूजन को कम करने, पोर्स के बंद होने की संभावना को घटाने और फ्यूचर में मुंहासों को रोकने के लिए टॉपिकल ट्रीटमेंट की सलाह दे सकते हैं. टॉपिकल ट्रीटमेंट में अक्सर बेजोयल पेरोक्साइड, सैलिसिलिक एसिड, रेटिनोइड्स और कुछ मामलों में एंटीबायोटिक्स होते हैं. महिलाओं के लिए हार्मोन को संतुलित करने के लिए ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव या एंटी-एंड्रोजन दवाइयां दी जा सकती हैं.जिन लोगों को पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम या एंडोक्राइन सिस्टम से जुड़ी अन्य बीमारियां हैं, उन्हें अपनी त्वचा में लंबे समय तक बेहतर सुधार देखने के लिए उन बीमारियों का इलाज भी करवाना पड़ सकता है.
फूड्स हैबिट्स बदलें!
हार्मोनल एक्ने को मैनेज करने के लिए जीवनशैली में बदलाव करना जरूरी है, जैसे कि हेल्दी खाना खाना, चीनी और प्रोसेस्ड फ़ूड कम खाना, भरपूर नींद लेना, रेगुलर एक्सरसाइज करना और स्ट्रेस कम करना. हालांकि, सिर्फ डाइट से सीधे हार्मोनल एक्ने नहीं होता, लेकिन कुछ लोगों में कुछ तरह के खाने से यह समस्या बढ़ सकती है.
इन बातों का ध्यान रखना जरूरी
लोगों को पिंपल्स को छूने या फोड़ने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे सूजन बढ़ सकती है, ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है और निशान पड़ने का खतरा भी बढ़ सकता है. बहुत हार्ड प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने के बजाय, एक अच्छा स्किनकेयर रूटीन अपनाना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है, जिसमें माइल्ड क्लींजर, नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन का इस्तेमाल शामिल है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.