Atta vs Maida vs Suji vs Besan: रोज के खानपान में आटा, मैदा, सूजी और बेसन का खूब इस्तेमाल किया जाता है. रोटी, पराठा, ब्रेड, समोसा, हलवा, चीला और ढोकला जैसे कई टेस्टी डिशेज इन्हीं चीजों से बनती हैं. गेहूं का आटा सबसे ज्यादा उपयोग की जाने वाली चीज है. जंक फूड्स में मैदा का काफी यूज किया जाता है. ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि आटा, मैदा, सूजी और बेसन में सबसे हेल्दी विकल्प कौन-सा है और किसका ज्यादा सेवन सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है.
नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया किसी भी चीज की क्वालिटी इस बात पर डिपेंड करती है कि उसमें फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स कितनी मात्रा में मौजूद हैं. यह भी जरूरी है कि वह ब्लड शुगर को कितनी तेजी से बढ़ाता है और पाचन तंत्र पर उसका क्या असर पड़ता है. अधिकतर लोग आटा और मैदा का रोजाना सेवन करते हैं, जबकि सूजी और बेसन का उपयोग भी समय-समय पर खूब किया जाता है. चारों ही चीजों में पोषक तत्वों की मात्रा अलग है और इसी के आधार पर इन्हें हेल्दी या अनहेल्दी माना जाता है.
सेहत के लिए गेहूं का आटा कैसा है?
डाइटिशियन के मुताबिक साबुत गेहूं का आटा पोषण के मामले में सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है. इसमें फाइबर, बी-विटामिन, आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट पर्याप्त मात्रा में होते हैं. फाइबर की मौजूदगी पाचन को बेहतर बनाती है, कब्ज की समस्या को कम करती है और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करती है. जो लोग रोज रोटी खाते हैं, उनके लिए गेहूं का आटा मैदा की तुलना में बेहतर है, क्योंकि यह ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता और वजन भी कंट्रोल रखता है.
बेसन प्रोटीन और फाइबर का अच्छा सोर्स
एक्सपर्ट ने बताया कि बेसन चने की दाल से तैयार किया जाता है और इसमें प्रोटीन की मात्रा गेहूं के आटे की तुलना में ज्यादा होती है. यही कारण है कि बेसन से बना चीला या अन्य व्यंजनों को हेल्दी स्नैक माना जाता है. बेसन की एक खास बात यह भी है कि यह ग्लूटेन-फ्री होता है. जिन लोगों को ग्लूटेन से संबंधित समस्या होती है, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर भूख को कंट्रोल रखने में मदद करते हैं, जिससे ओवरईटिंग से बचाव होता है.
सूजी भी आटे जितनी पौष्टिक नहीं
डाइटिशियन कामिनी का साफ कहना है कि सूजी भी गेहूं से ही बनती है, लेकिन इसे तैयार करने की प्रक्रिया में अनाज के कुछ हिस्से अलग हो जाते हैं, जिससे फाइबर की मात्रा कम हो जाती है. यही कारण है कि सूजी को पोषण के मामले में साबुत आटे से नीचे रखा जाता है. सूजी ज्यादा नुकसानदायक नहीं है. इससे बने व्यंजन जैसे उपमा या इडली हल्के और आसानी से पचने वाले होते हैं. जिन लोगों को डायबिटीज है या जो वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें सूजी कम खानी चाहिए.
मैदा क्यों सबसे ज्यादा खराब
एक्सपर्ट का साफ कहना है कि मैदा को अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स में गिना जाता है. इसे बनाते समय गेहूं का चोकर और जर्म पूरी तरह हटा दिया जाता है, जिससे अधिकांश फाइबर, विटामिन और मिनरल्स नष्ट हो जाते हैं. मैदा मुख्य रूप से स्टार्च का स्रोत बनकर रह जाता है. मैदा से बनी चीजें जैसे व्हाइट ब्रेड, पेस्ट्री, पिज्जा बेस और कई प्रकार के बेकरी उत्पाद जल्दी पच जाते हैं, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. इनमें फाइबर की कमी होने के कारण पेट जल्दी खाली महसूस होता है और बार-बार भूख लग सकती है. लंबे समय तक अत्यधिक मात्रा में मैदा का सेवन मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है.
सबसे ज्यादा हेल्दी कौन सी चीज
डाइटिशियन के अनुसार अगर पोषण, फाइबर, प्रोटीन और सेहत पर असर के आधार पर तुलना की जाए, तो गेहूं का आटा और बेसन को सबसे बेहतर विकल्प माना जा सकता है. गेहूं का आटा रोजमर्रा की डाइट के लिए संतुलित माना जाता है, जबकि बेसन अतिरिक्त प्रोटीन और फाइबर प्रदान करता है. सूजी को सीमित मात्रा में शामिल किया जा सकता है, लेकिन मैदा का सेवन जितना कम हो, उतना बेहतर माना जाता है. एक्सपर्ट हमेशा कम प्रोसेस्ड और अधिक फाइबर वाले विकल्प चुनने की सलाह देते हैं.